श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)
Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंग्यारहवाँ अध्याय ७८३
अर्जुन उवाच ।
§§ पश्यामि देवांस्तव देव देहे सर्वांस्तथा भूतविशेषसंघान् ।
ब्रह्माणमीशं कमलासनस्थमृषींश्च सर्वानुरगांश्च दिव्यान् ॥ १५ ॥
अनेकबाहूदरवक्त्रनेत्रं पश्यामि त्वां सर्वतोऽनन्तरूपम् ।
नान्तं न मध्यं न पुनस्तवादिं पश्यामि विश्वेश्वर विश्वरूप ॥ १६ ॥
किरीटिनं गदिनं चक्रिणं च तेजोरारिं सर्वतो दीप्तिमन्तम् ।
पश्यामि त्वां दुर्निरीक्ष्यं समन्ताद्दीप्तानलार्कद्युतिमप्रमेयम् ॥ १७ ॥
त्वमक्षरं परमं वेदितव्यं त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम् ।
त्वमव्ययः शाश्वतधर्मगोप्ता सनातनस्त्वं पुरुषो मतो मे ॥ १८ ॥
अनादिमध्यान्तमनन्तवीर्यमनन्तबाहुं शशिसूर्यनेत्रम् ।
पश्यामि त्वां दीप्तहुताशवक्त्रं स्वतेजसा विश्वमिदं तपन्तम् ॥ १९ ॥
द्यावापृथिव्योरिदमन्तरं हि व्याप्तं त्वयैकेन दिशश्च सर्वाः ।
दृष्ट्वाद्भुतं रूपमुग्रं तवेदं लोकत्रयं प्रव्यथितं महात्मन् ॥ २० ॥
आये; और मस्तक नमाकर नमस्कार करके एवं हाथ जोड़कर उस अर्जुनने
देवतासे कहा :-
अर्जुनने कहा :- ( १५ ) हे देव ! तुम्हारी इस देहमें सब देवताओंको
और नाना प्रकारके प्राणियोंके समुदायोंको, ऐसेही कमलासनपर बैठे हुए ( सब
देवताओंके ) स्वामी ब्रह्मदेवको, सब ऋषियोंको, और ( वासुकि प्रभृति ) सब
दिव्य सर्पोंकोभी मैं देख रहा हूँ । ( १६ ) अनेक बाहु, अनेक उदर, अनेक
मुख और अनेक नेत्रधारी, अनंतरूपी तुम्हींको मैं चारों ओर देखता हूँ; परंतु
हे विश्वेश्वर विश्वरूप ! तुम्हारा न तो अंत, न मध्य या न आदिभी मुझे
( कहीं ) दीख पड़ता है । ( १७ ) किरीट, गदा और चक्र धारण करनेवाले,
चारों ओर प्रभा फैलाये हुए; तेजःपुंज, दमकते हुए अग्नि और सूर्यके समान
देदीप्यमान्, आँखोंसे देखनेमेंभी अशक्य और अपरंपार ( भरे हुए ) तुम्हीं मुझे
जहाँ-तहाँ दीख पड़ते हो । ( १८ ) तुम्हीं अंतिम ज्ञेय अक्षर ( ब्रह्म ), तुम्हीं
इस विश्वके अंतिम आधार, तुम्हीं अव्यय और तुम्हीं शाश्वत धर्मके रक्षक हो,
और मुझे सनातन पुरुष तुम्हीं जान पड़ते हो । ( १९ ) मैं देख रहा हूँ, कि
जिसके न आदि है, न मध्य या न अंत, अनंत जिसके बाहु हैं, चंद्र और सूर्य
जिसके नेत्र हैं, प्रज्वलित अग्नि जिसका मुख है, ऐसे अनंत शक्तिमान् तुम्हीं
अपने तेजसे इस समस्त जगतको तपा रहे हो । ( २० ) क्योंकि आकाश और