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सर्वकोश
श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा

DevanagariHindipublished956 पृष्ठ

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पृष्ठ 784

सातवाँ अध्याय ७३९
वेदाहं समतीतानि वर्तमानानि चार्जुन ।
भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्चन ॥ २६ ॥
इच्छाद्वेषसमुत्थेन द्वन्द्वमोहेन भारत ।
सर्वभूतानि सम्मोहं सर्गे यान्ति परंतप ॥ २७ ॥
येषां त्वन्तगतं पापं जनानां पुण्यकर्मणाम् ।
ते द्वन्द्वमोहनिर्मुक्ता भजन्ते मां दृढव्रताः ॥ २८ ॥
§ § जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये ।
ते ब्रह्म तद्विदुः कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम् ॥ २९ ॥
साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदुः ।
प्रयाणकालेऽपि च मां ते विदुर्युक्तचेतसः ॥ ३० ॥
इति श्रीमद्भगवद्गीतासु उपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुन-संवादे
ज्ञानविज्ञानयोगो नाम सप्तमोऽध्यायः ॥ ७ ॥
| देवताओंकाही फायदा है, उनके भक्तोंको मोक्ष नही मिलता । मायामें उलझ
| कर भेदभावसे अनेक देवताओंकी उपासना करनेवालोंका वर्णन हो चुका; अब
| बतलाते हैं, कि इस मायासे धीरे धीरे छुटकारा क्योंकर होता है :- ]
(२६) हे अर्जुन ! भूत, वर्तमान और भविष्यत् ( कालमें जो हो चुके हैं उन्हें,
मौजूदा और आगे होनेवाले ) सभी प्राणियोंको मैं जानता हूँ; परंतु मुझे कोईभी
नहीं जानता । (२७) क्योंकि हे भारत ! ( इंद्रियोंकी ) इच्छाओं और द्वेषसे
उपजनेवाले (सुख-दुःख आदि) द्वंद्वोंके मोहसे समस्त प्राणी, हे परंतप ! इस सृष्टिमें
भ्रममें फँस जाते हैं । (२८) परंतु जिन पुण्यात्माओंके पापका अंत हो गया है, वे
(सुख-दुःख आदि) द्वंद्वोंके मोहसे छूट कर दृढव्रत ही करके मेरी भक्ति करते हैं ।
| [ इस प्रकार मायासे छुटकारा हो चुकनेपर, आगे उनकी जो स्थिति
| होती है, उसका वर्णन करते हैं :- ]
(२९) जो ( इस प्रकार ) मेरा आश्रयकर जरा-मरणसे अर्थात् पुनर्जन्मके
चक्करसे छूटनेके लिये प्रयत्न करते हैं, वे (सब) ब्रह्म, (सब) अध्यात्म और सब
कर्मको जान लेते हैं । (३०) और अधिभूत, अधिदैव एवं अधियज्ञसहित ( अर्थात्
यह इस प्रकार, कि मैंही यह सब हूँ ) जो मुझे जानते हैं, वे युक्तचित्त ( होनेके
कारण ) मरण-कालमेंभी मुझे जानते हैं ।
| [ अगले अध्यायमें अध्यात्म, अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञका निरूपण
| किया है। धर्मशास्त्रका और उपनिषदोंका सिद्धान्त है, कि मरण-कालमें मनुष्यके