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सर्वकोश
श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)

श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा

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हैं और इसके लिए हम उन्हें धन्यवाद देते हैं।

मौलिक बंगाली कथामृत का अनुवाद अन्य कई भाषाओं में हो चुका है और इसका पूर्ण रूप से तथा क्रमानुसार हिन्दी में अनुवाद होना बहुत समय से वांछनीय था। हमें आशा है हमारे इस प्रकाशन से हिन्दी जनता की एक बड़ी जरूरत की पूर्ति हो जाएगी। साथ ही यह पुस्तक श्रीरामकृष्ण आश्रम, धन्तोली, नागपुर, सी. पी. से प्रकाशित श्रीरामकृष्ण परमहंसदेव की विस्तृत जीवनी (श्रीरामकृष्ण लीलामृत भाग १ और २) के लिए परिपूरक के सदृश है।

हमारे इस प्रकाशन से यदि पाठकों को कुछ लाभ हुआ तो हमें बड़ी प्रसन्नता होगी और हम अपने यत्नों को सफल मानेंगे।

हमारी यह आन्तरिक एवं हार्दिक प्रार्थना है कि यह पुस्तक उन सज्जनों के लिए पथ-पदर्शक हो जो सत्य की खोज में दृढ़ मन से लगे हैं।

वैशाख, अक्षय तृतीया
ता. २९-४-१९४१
नागपुर, सी.पी.
— प्रकाशक


वक्तव्य

(सतरहवाँ संस्करण)

प्रस्तुत ग्रन्थ हिन्दी में प्रथम तीन भागों में हमने प्रकाशित किया था। पाठकों की सुविधा के लिए अब हम इसे दो भागों में प्रकाशित कर रहे हैं, जिसका प्रथम भाग आपके हाथ में है। इसमें २६ फरवरी १८८२ से ४ अक्टूबर १८८४ तक का वार्तालाप आया है। दूसरे भाग में अक्टूबर १८८४ से २४ अप्रैल १८८६ तक का वार्तालाप समाविष्ट है।

विश्वास है, यह पुस्तक पाठकों का सभी दृष्टि से हित करने में सफल होगी।

नागपुर
दि. २८.७.१९९९
— प्रकाशक