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श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

[ उच्छि-छन्द शब्दकोश 527
उ
उच्छिष्ट—खाकर छोड़ा हुआ, परित्यक्त
उत्कृष्ट—उन्नत, श्रेष्ठ
उद्बुद्ध—जगा या जगाया हुआ, विकसित
उद्भासित—व्यक्त, चमकता हुआ
उद्यत—तैयार
उद्रेक—प्रचुरता, बढ़ती
उद्वेग—क्षोभ, चित्तकी अस्थिरता
उपक्रम—योजना, आरम्भ, प्रयास
उपशम—विराग, विरक्ति
उपलक्षित—इशारेसे बताया हुआ
उपाङ्ग—छोटा या सहायक अंग
उपार्जित—कमाया हुआ
उपादान—साधन-सामग्री
उपादेय—ग्रहण करने योग्य, उपयोगी
उपेयत्व—उपाय-योग्य होनेका भाव
उरु—विस्तृत, महान
उरुक्रम—विष्णु
उरुगाय—उत्तम व्यक्तियोंके द्वारा जिसका
स्तुतिगान किया गया हो
ए
एकरस—जो सदा एक रूपमें रहे,
एकीभूत—जो मिलकर एक हो गया हो
ऐ
ऐहिक—सांसारिक
औ
औत्सुक्य—उत्सुकता
औद्धत्य—उद्धतता, अख्खड़पन
औपाधिक—उपाधियुक्त
क
कर्त्तृत्व—कर्ताका धर्म, कार्य
कलुषित—गंदा, कलुषयुक्त
कल्प—वेदका एक अङ्ग, ब्रह्माका एक दिन
कल्पवृक्ष—इच्छा पूरी करनेवाला वृक्ष
काम्यकर्म—फलकी कामनासे किया
जानेवाला कर्म
कैतव—छल, धोखा
केवला भक्ति—शुद्धा भक्ति
कैङ्कर्य—दासत्व
कैवल्य मुक्ति—निर्वाण मुक्ति
कौतूहलवश—उत्सुकतावश
क्रोड़ीभूत—अन्तर्भूत
क्लान्त—थका हुआ, क्षीण
क्ष
क्षिति—पृथ्वी
क्षेत्र—शरीर
क्षेत्रज्ञ—शरीरका ज्ञाता, आत्मा तथा
परमात्मा
क्षोभ—असन्तोष, व्याकुलता
ग
ग्रथित—गूँथा हुआ
ग्रन्थि—गाँठ
ग्रास—आहार
ग्रीवा—गर्दन
घ
घ्राण—गन्ध, सूँघनेकी शक्ति
च
चित्तगुहा—हृदयरूपी कन्दरा
चित्-शक्ति—भगवानकी एक प्रकारकी शक्ति
चिदालोचना—चित्-वस्तुकी आलोचना
चिन्तामल—चिन्तारूपी मल
चिन्मयत्व—चिन्मयता
चैतन्यत्व—चेतनता
चैतन्यनिष्ठ—चित्-वस्तुमें जिसकी निष्ठा है
चैतन्यहीन—चेतनारहित
छ
छन्दविद्या—अठारह विद्याओंमें एक

528 श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत अन्त्यलीला जर्ज–नैति ]
ज
जर्जरित—जो जर्जर हो गया हो
त
तत्त्वज्ञान—तत्त्ववस्तुका ज्ञान
तत्त्वतः—यथार्थतः
तत्त्वविद्—तत्त्वको जाननेवाला
तदीय—भगवत्-सम्बन्धी
तनय—पुत्र
तन्मय—तल्लीन
तादात्म्य—दो वस्तुओंके परस्पर अभिन्न
होनेका स्वभाव
तारतम्य—दो वस्तुओंके घट-बढ़कर होनेका
भाव
तिर्यग्—पशु-पक्षी
तैलधारावत्—तैलकी भाँति धारावाला
त्रिगुणातीत—तीनों गुणोंसे अतीत
त्रिवर्ग—धर्म, अर्थ और काम
द
दिक्पाल—दश दिशाओंके रक्षक देवता
दुर्ज्ञेय, दुर्बोध—कठिनाईसे जानने योग्य
दुर्निगृहीत—कठिनाईसे वशमें लाया हुआ
दुर्निवारित—कठिनाईसे निवारण किया हुआ
दुरुह—कठिन
दुस्त्याज्य—नहीं त्यागने योग्य
देदीप्यमान—चकमता-दमकता हुआ
देहाध्यास—देहमें मिथ्या अभिमान
द्रव्यमययज्ञ—द्रव्य द्वारा किया गया यज्ञ
द्विजवर—ब्राह्मणश्रेष्ठ
द्वैतभाव—दो होनेका भाव
ध
धूसरित—धूलसे भरा हुआ
ध्वनित होना—पता चलना
न
नराकृति—मनुष्यके समान आकृति
नामाभास—नामका आभास
निःशक्तिक—शक्तिरहित
निःश्वास—प्राणवायु या साँसका बाहर
निकलना
निःसृत—निकला हुआ
निकृष्ट—तुच्छ
निकेतन—घर
निक्षेप करना—फेंकना
निगृहीत—निग्रह किया हुआ
निग्रह—संयम
निन्तान्त—अत्यन्त, एकदम
निमज्जित—डूबा हुआ, स्नात
नियमाग्रह—नियम-पालनमें आलस्य
निरञ्जन—निर्दोष, अज्ञानसे रहित
निरपेक्ष—किसी औरकी अपेक्षा नहीं
निर्गत—बाहर निकला हुआ
निर्गुण—सत्त्व, रज और तमोगुणसे अतीत
निर्दिष्ट—निर्देशित
निर्वाण—मोक्ष
निर्विकल्प—विकल्पसे रहित
निर्विवाद—बिना विवादका
निरुद्ध—विशेषरूपसे रोका हुआ
निरूपक—निरूपण करनेवाला
निरूपण—किसी विषयको ठीक-ठीक समझा
देना
निशा—रात्रि
निष्काम कर्म—कामनासे रहित कर्म
निष्पन्न—जिसकी उत्पत्ति हुई है
निसर्गवाद—प्रकृतिवाद (प्रकृति ही जगत्की
सृष्टि करनेवाली है, ऐसा मतवाद)
निस्तारक—निस्तार करनेवाला
निस्त्रैगुण्य—तीनों गुणोंसे अतीत
निहत—मारा हुआ
नीलमणि—नीलम
नैतिक—नीति-सम्बन्धी

[ नैमि-प्राकृ शब्दकोश 529

नैमित्तिक—निमित्तसे उत्पन्न
नैरन्तर्य—निरन्तर होनेका भाव
नैर्घृण्य—निर्ममता, क्रूरता
प
पक्षान्तर—दूसरी ओर
पन्था—पथ
परिज्ञात—अच्छे प्रकारसे ज्ञात
परिनिष्ठित—दूसरेमें निष्ठावाला
परदार—दूसरेकी स्त्री
परवर्ती—बादमें
पराक्रान्त—शक्तिशाली
परिग्रह—ग्रहण
पराभक्ति—श्रेष्ठा, शुद्धा भक्ति
पराभूत—पराजित
परिचर्या—सेवा
परिचालक—चलानेवाला
परिदृष्ट—दृष्ट
परिनिष्ठित—पूर्णतया निपुण
परिमित—सीमित
परिलक्षित—अच्छी तरह देखाभाला हुआ
परिव्राजक—संन्यासी
परिवेष्टित—घिरा हुआ
पर्यन्त—तक
पर्यवसित—समाप्त
पाण्डित्य—विद्वता
पारत्रिक—परलोक-सम्बन्धी
पारलौकिक—परलोक-सम्बन्धी
पार्षद—परिकर
पाषण्डी—पाखण्डी
पूर्वपक्ष—संशयके सम्बन्धमें उठाया गया प्रश्न
पूर्वराग—मिलनसे पहलेका राग
प्रकरण—निर्माण, प्रसङ्ग
प्रकृत—यथार्थ
प्रकृष्ट—उत्तम
प्रक्षिप्त—बादमें जोड़ा या घुसाया हुआ

प्रच्छन्न—ढका हुआ
प्रजल्प—इधर-उधरकी बात
प्रज्ञा—बुद्धि
प्रणयन—रचना, निर्माण
प्रणत—शरणागत
प्रणतपाल—शरणागतकी रक्षा करनेवाले
प्रणति—प्रणाम, शरणागति
प्रताड़ित—सताया गया
प्रतिपादित—प्रमाणित
प्रतिपाद्य—जिसे प्रमाणित किया जाय
प्रतिभात—प्रभावयुक्त, ज्ञात
प्रतीयमान—जान पड़ता हुआ, जिसकी प्रतीति
हो रही हो
प्रत्यगात्मा—जीवात्मा
प्रत्यवाय—दोष
प्रत्याहार—निरोध, रोकना
प्रत्युपकार—भलाईके बदलेमें की हुई भलाई
प्रदत्त—दिया हुआ
प्रधान—मायाकी एक वृत्ति
प्रधानतः—मुख्यरूपसे
प्रपत्ति—शरणागति
प्रभूत—अत्यधिक
प्रभृति—जैसा
प्रयोजनीयता—आवश्यकता
प्रयोजक—प्रयुक्त करनेवाला
प्रयोजकत्व—प्रयोजक होनेका भाव
प्रवर—श्रेष्ठ
प्रवर्त्तक—किसी काममें लगानेवाला, आरम्भ
करनेवाला
प्रवृत्ति—मनका किसी विषयकी ओर झुकाव,
प्रभाव
प्रशस्त—प्रशंसाके योग्य
प्रशान्तात्मा—शुद्ध या शान्त आत्मा
प्रशामक—शान्त करनेवाला
प्राकृत—प्रकृति-सम्बन्धी

530 श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत अन्त्यलीला प्राक्त-विक्षि ]
प्राक्तन-प्राचीन
प्रादुर्भूत-आविर्भूत, अवतरित
प्रादेशिक वाक्य-प्रसङ्गत, स्थानीय वाक्य
प्रापक-प्राप्त करने या करानेवाला
प्रापञ्चिक-जगत् या प्रपञ्च-सम्बन्धी
प्राप्य-प्राप्त होने योग्य
प्रार्थित-प्रार्थना किया हुआ
प्रेमास्पद-प्रेमका स्थल
प्रेमोत्कर्ष-प्रेमका उत्कर्ष
ब
बाहुल्य-अधिकता
बाह्य अङ्ग-बाहरी अङ्ग
बहिर्वास-शरीरके ऊपरी भागको लपेटनेवाला
वस्त्र
बिद्ध-छेदा हुआ, आहत
बृहत्-बड़ा
बोधगम्य-समझमें आने योग्य
ब्रह्मलय-ब्रह्ममें लय होना
ब्रह्मवेत्ता-ब्रह्मको जाननेवाला
ब्रह्मानन्द-ब्रह्मका आनन्द
ब्रह्मानुभूति-ब्रह्मकी अनुभूति
भ
भक्तानन्दायिनी-भक्तोंको आनन्द देनेवाली
भोक्तृत्वभाव-भोक्ता होनेका भाव
म
मत्सम्बन्धी-मेरे सम्बन्धी
मत्सरता-डाह, जलन, द्वेष
मथन-मथनेका भाव
मधुरिमा-माधुर्य
मन्वन्तर-ब्रह्माजीके दिनका चौदहवाँ भाग
मन्तव्य-विचार, मत
मर्मार्थ-सार
महत्-बड़ा
मायाच्छन्न-मायाके द्वारा आच्छन्न
मुकुलित-आधा विकसित
मुमुक्षु-मुक्तिकी इच्छा करनेवाला
मेधायुक्त-मेधावी
मोहान्ध-मोहसे अन्धा
म्लेच्छ-चारो वर्णोंसे भी नीच
य
यतिगण-संन्यासी लोग
याग-यज्ञ
यादृच्छिक-स्वतन्त्र, ऐच्छिक
युक्तियुक्त-उचित, युक्तिपूर्ण
युगपत्-एक ही समयमें, साथ-साथ
युगावतार-प्रत्येक युगमें लेनेवाले अवतार
योगमाया-भगवान्‌की परा शक्ति
योगस्थैर्य-योगकी स्थिरता
र
रक्तिम-लालिमायुक्त
रञ्जित-रंगा हुआ
रूक्ष-रूखा, नीरस
ल
लिङ्गशरीर-सूक्ष्म शरीर
लिप्सा-किसी वस्तुको पानेकी इच्छा
लुब्ध-ललचाया हुआ, लोभित
लोकपाल-लोकका पालन करनेवाला
लोकप्रवर्त्तन-लोगोंके कल्याणके लिये
व
वञ्चक-वञ्चना करनेवाला
वयस-उम्र
वर्चस्व-अधिकार
वर्णविशिष्ट-वर्णवाला
वर्णसङ्कर-भिन्न जातियोंके स्त्री-पुरुषसे उत्पन्न
वाक्-वाणी, बोलनेकी इन्द्रिय
वाचाल-अधिक बोलनेवाला
वागिन्द्रिय-जिह्वा
विक्षिप्त-पागल, उद्विग्न

[ विगु-साम्य शब्दकोश 531
विगुण—गुणहीन
विच्युति—भूल, पतन, वियोग
विजितात्मा—जिसने मनको जीत लिया है
विज्ञ—पण्डित, जाननेवाला
विदित—मालूम
विधर्म—धर्मविरुद्ध
विधिवादिगण—नैतिक लोग
विधेय—करने योग्य
विधेयात्मा—जिसकी आत्मा संयत हो
विन्यास—व्यवस्थित करना
विपर्यय—प्रतिकूलता, विपरीतता
विभूति—ऐश्वर्य
विरहकातर—विरहसे कातर
विरोधाभास—विचारमें विरोध प्रतीत होना
विलास—क्रीड़ा
विवक्षित—इच्छित, कथित
विवृत—स्पष्ट, व्यक्त
विशारद—निपुण
विशिष्ट—विशेषतायुक्त
विशिष्टता—विशेषता
विशुद्धचित्त—जिसका चित्त शुद्ध है
विशेषत्व—विशेषता
विषयणी—विषयसे सम्बन्धित
विहित—आदेश किया हुआ
वृष्टि—वर्षा
वेदज्ञ—वेदोंके जाननेवाला
वैषम्य—विषमता
व्यङ्गोक्ति—गूढ़भाषा, वह भाषा जिसमें व्यङ्ग
हो
व्यतिक्रम—उल्लङ्घन
व्यतिरेक—असङ्गति, निषेध
व्यवहृत—व्यवहार किया हुआ
व्योम—आकाश
श
शोच्य—शोचनीय
शैव—शिवके उपासक
श्रुत—सुना हुआ
श्रोतव्य—सुनने योग्य
श्लेषोक्ति—छिपे अर्थवाली बात
ष
षडैश्वर्यपूर्ण—छः ऐश्वर्योंसे परिपूर्ण
स
सङ्कीर्णता—उदार ना होनेका भाव
संवरण—छिपाना
संवेदन—अनुभूति
संस्पर्श—अच्छी तरहसे होनेवाला स्पर्श
संहर्त्ता—संहार करनेवाला
सङ्गति—मेल
सञ्चित—जमा किया हुआ
सदातन—विष्णु
सद्विवेकी—सद् विवेकवाला
समत्वभाव—समताका भाव
सन्निविष्ट—उत्तम रूपसे एकाग्र
समाहर—समुच्चय, समूह
समाहित—संयमित, व्यवस्थित
सम्बन्धविशिष्ट—सम्बन्धवाला
सम्मत—सहमत, एक मत
समन्वित—संयुक्त, स्वाभाविक रूपसे क्रमबद्ध
सम्यक्—भलीभाँति, अच्छी तरह
सर्वतन्त्र—समस्त सिद्धान्त
सर्वतोभावेन—सम्पूर्ण रूपसे
सर्वभूतात्मा—सभी जीवोंके आत्मा अर्थात्
परमात्मा
सर्वभुक्—सब कुछ खा जानेवाला
सर्वात्मकत्व—सर्वात्मकता
सहस्र—हजार
साम—सामवेद
सामर्थ्यविशिष्ट—सामर्थ्यवान्
साम्यलक्षण—समानताका लक्षण

532 श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत अन्त्यलीला सार-हृद ]
सारगर्भित—तत्त्वपूर्ण स्पृहा—इच्छा, आकाङ्क्षा
सालोक्य मुक्ति—जीवका भगवान्‌के साथ स्फुरण—व्यक्त होना
एक ही लोकमें वास करना स्फुलिङ्ग—चिङ्गारी
साष्टाङ्ग प्रणाम—आठ अङ्गोंसे प्रणाम (सिर, स्मार्त्त—स्मृति शास्त्रका अनुयायी
हाथ, पैर, आँख, जंघा, हृदय, स्थायित्व—स्थिरता
वचन और मन) स्रुवा—घीमें आहुति डालनेकी करछी
सुखान्वेषी—सुखकी खोज करनेवाला स्वच्छन्द—स्वतन्त्र
सुदुराचारी—अति दुराचारी स्वधर्मस्थ—अपने धर्ममें स्थित
सुधा—अमृत स्वयंभू—स्वयं उत्पन्न
सुरस—रसयुक्त स्वानन्दपूर्ण—अपने आनन्दमें पूर्ण
सुष्ठु—भली भाँति, अच्छी तरह ह
सुस्पष्ट—विशेषरूपसे स्पष्ट हत—मरा हुआ
सौम्य—सुन्दर, कोमल हतभागा—भाग्यहीन
स्खलित—गिरा हुआ हन्त—मारना
स्निग्ध—स्नेहयुक्त, प्रियता हिरण्यगर्भ—ब्रह्मा
स्नेहाधिक्य—स्नेहकी अधिकता हेयता—तुच्छता
स्फूर्ति—स्फुरण, व्यक्त होना हृदगत—हृदय-सम्बन्धी