श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 841, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ेंशब्दकोश विगुण-सारगर्भित ]
विगुण-गुणहीन
विच्युति-भूल, पतन, वियोग
विजितात्मा-जिसने मनको जीत लिया है
विज्ञ-पण्डित, जाननेवाला
विदित-मालूम
विधर्म-धर्मविरुद्ध
विधिवादिगण-नैतिक लोग
विधेय-करने योग्य
विधेयात्मा-जिसकी आत्मा संयत हो
विन्यास-व्यवस्थित करना
विपर्यय-प्रतिकूलता, विपरीतता
विभूति-ऐश्वर्य
विरहकातर-विरहसे कातर
विरोधाभास-विचारमें विरोध प्रतीत होना
विलास-क्रीड़ा
विवक्षित-इच्छित, कथित
विवृत-स्पष्ट, व्यक्त
विशारद-निपुण
विशिष्ट-विशेषतायुक्त
विशिष्टता-विशेषता
विशुद्धचित्त-जिसका चित्त शुद्ध है
विशेषत्व-विशेषता
विषयणी-विषयसे सम्बन्धित
विहित-आदेश किया हुआ
वृष्टि-वर्षा
वेदज्ञ-वेदोंके जाननेवाला
वैषम्य-विषमता
व्यङ्गोक्ति-गूढ़भाषा, वह भाषा जिसमें व्यङ्ग हो
व्यतिक्रम-उल्लङ्घन
व्यतिरेक-असङ्गति, निषेध
व्यवहृत-व्यवहार किया हुआ
व्योम-आकाश
श
शोच्य-शोचनीय
शैव-शिवके उपासक
श्रुत-सुना हुआ
श्रोतव्य-सुनने योग्य
श्लेषोक्ति-छिपे अर्थवाली बात
ष
षडैश्वर्यपूर्ण-छः ऐश्वर्योंसे परिपूर्ण
स
सङ्कीर्णता-उदार ना होनेका भाव
संवरण-छिपाना
संवेदन-अनुभूति
संस्पर्श-अच्छी तरहसे होनेवाला स्पर्श
संहर्त्ता-संहार करनेवाला
सङ्गति-मेल
सञ्चित-जमा किया हुआ
सदातन-विष्णु
सद्विवेकी-सद् विवेकवाला
समत्वभाव-समताका भाव
सन्निविष्ट-उत्तम रूपसे एकाग्र
समाहर-समुच्चय, समूह
समाहित-संयमित, व्यवस्थित
सम्बन्धविशिष्ट-सम्बन्धवाला
सम्मत-सहमत, एक मत
समन्वित-संयुक्त, स्वाभाविक रूपसे क्रमबद्ध
सम्यक्-भलीभाँति, अच्छी तरह
सर्वतन्त्र-समस्त सिद्धान्त
सर्वतोभावेन-सम्पूर्ण रूपसे
सर्वभूतात्मा-सभी जीवोंके आत्मा अर्थात् परमात्मा
सर्वभुक्-सब कुछ खा जानेवाला
सर्वात्मकत्व-सर्वात्मकता
सहस्र-हजार
साम-सामवेद
सामर्थ्यविशिष्ट-सामर्थ्यवान्
साम्यलक्षण-समानताका लक्षण
सारगर्भित-तत्त्वपूर्ण
| 305