श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनिरन्तर-प्रभुर ]
निरन्तर कृष्णनाम ७/९५
निरन्तर देखि सबार ६/९४
निरन्तर सदैन्ये ३/१००
निरुपाधि प्रेम याँहा, ४/२००
निरवधि गुण गान, अन्त ५/१२१
निर्विशेष ज्योतिर्बिम्ब ५/३७
निर्विशेष-ब्रह्म सेइ ५/३८
निर्मल, उज्ज्वल, शुद्ध ४/२०९
निःशङ्के कहिये, तार ४/२३७
निश्वास सहिते हय ५/६८
निषेध करिते नारे, ५/१५१
नृत्यकाले परि' ३/४६
नैहाटि-निकटे ५/१८१
'न्यग्रोधपरिमण्डल' ३/४३
प
पञ्चतत्त्व अवतीर्ण चैतन्येर ७/४
पञ्चतत्त्व-एक वस्तु ७/५
पञ्चतत्त्व लञा करेन ७/४
पञ्चतत्त्वेर विचार किछु ६/११७
पञ्चमपुरुषार्थ सेइ प्रेम ७/१४४
पञ्चविंशति वर्षे कैल ७/३४
पञ्चम पुरुषार्थ-प्रेमानन्द ७/८५
पञ्चरूप धरि' करेन ५/८
पञ्चाशत कोटि-योजन ५/११९
पट्टवस्त्र शिरे, पट्टवस्त्र ५/१८५
पडुया, पाषण्डी, कर्मी ७/३६
परकीयभावे अति रसेर ४/४७
परम ईश्वर कृष्ण २/१०६
परमप्रेयसी लक्ष्मी हृदये ६/४५
परव्योम-मध्ये करि' ५/२६
परव्योमेते वैसे नारायण २/२३
परव्योमे नारायण २/७१
परस्पर बाड़े, केह ४/१९३
परस्पर वेणुगीते हरये ४/२५१
परिणाम-वादे ईश्वर ७/१२२
परिभाषारूपे इहार २/५९
पाँचे मिलि' लूटे प्रेम ७/२१
पागल हइलाङ आमि, ७/८०
पात्रापात्र-विचार नाहि ७/२३
पाद-प्रक्षालिया बसिला ७/५९
पायेते नूपुर बाजे, कण्ठे ५/१८
पारिषदगण एक १/६४
पारिषदगणे देखि' सब ५/१९१
पालयिता विष्णु,-ताँर ५/१११
पाषण्डदलनवाना ३/७५
पिता माता गुरु ३/९३, ४/२७१, ६/८०
पिता-माता बालकेर २/३३
पृच्छिल, — “तोमार नाम ७/६६
पुनः पुनः पियाइया हय ७/२२
पुनरपि श्वास यबे प्रवेशे ५/६९
पुरीषेर कीट हैते मुञि ५/२०५
पुरीसह सर्वलोक हैल ७/१५५
पुरुष ईश्वर ऐछे द्विमूर्त्ति ६/१५
पुरुष-नासाते यबे बाहिराय ५/६८
'पुरुषेर अंश' पाछे २/८०
पुरुषेर लोमकूपे ब्रह्माण्डरे ५/७०
पुषिल, धरिल प्रेम ३/३३
पूर्णज्ञान पूर्णानन्द २/८
'पूर्णतत्त्व' याँरे कहे २/२४
पूर्ण भगवान् अवतरे ४/१०
पूर्ण भगवान् कृष्ण ३/५
पूर्णानन्दमय आमि ४/१२२
'पूर्णानन्द-रसस्वरूप सबे ४/२३८
पूर्वपक्ष कहे, —तोमार २/७१
पूर्व-प्रेमभाण्डारेर मुद्रा ७/२०
पूर्वे करियाछि एइ ६/१०८
पूर्वे व्रजे कृष्णेर त्रिविध ४/१९२
पूर्वे यैछे कृष्णके केहो ५/१२८
पूर्वे यैछे कैल सर्व ६/२६
पूर्वे येन तिनभावे व्रजे ५/१३५
पूर्वे येन पृथिवीर ४/७
पृथिवीते अवतरि' ३/२८
पृथिवी धरेन येइ शेष ६/९३
पृथ्वी यैछे घटकुलेर २/३७
पौगण्ड सफल कैल ४/१९३
प्रकटिया देखे ३/९५
प्रकाशविशेषे तँह २/१०
प्रकाशानन्द-नामे संन्यासी ७/६२
प्रकृति-कारण, यैछे ५/६१
प्रकृतिर पार 'परव्योम' ५/१४
प्रकृति सहिते ताँर उभय ५/८६
'प्रणव' महावाक्य-ताहा ७/१३०
'प्रणव' से महावाक्य ७/१२८
प्रत्यक्ष ताँहार ३/५८
प्रत्यक्षे देखह नाना ३/८४
प्रथमलीलाय ताँर ३/३२
प्रथमे करेन गुरुवर्गेर ३/९२
प्रथमे करेन सबार ३/९३
प्रभावे आकर्षिल सब ७/६१
प्रभावे देखिये तोमा ७/७०
प्रभु कहे, —“आमि हइ ७/६४
प्रभु-आज्ञा हैल ५/१९८
प्रभु कहे, “वेदान्त सूत्र ७/१०६
प्रभु कहे, —“शुन, श्रीपाद ७/७१
प्रभुके कहिल किछु ७/६२
प्रभुके देखिते आइसे ७/१५४
प्रभु-गुरु करि' माने ५/१४७
प्रभु यबे या'न विश्वेश्वर ७/१५७
प्रभुर उपाङ्ग-श्रीवासादि ६/३७
प्रभुर कृपाते सुखे ५/१९९
पद्य-सूची | ४६७