श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंताँहार-दर्पण ]
ताँहार विभूति, देह ७/११२ | ताहाते प्रमाण कृष्ण ४/१७९ | तैँह श्रीकृष्ण-ऐछे २/८५
ताँहार विशेष-ज्ञान २/८१ | ताहातेओ हओ तुमि २/४६ | तैँहो आपकाने करेन ६/७५
ताँहार श्रीमुखवाणी ६/५६ | ताहा देख, साक्षी तुमि २/४४ | तैँहो ईश्वर-हेन यदि ६/५७
ताँहार हुङ्कारे कैल ४/२७० | ताहा देखि' पाँचजनेर ७/२७ | तैँहो करेन कृष्णेर दास्य ६/७८
ताँहार हृदये भक्तभाव ६/८९ | ताहा देखि' महाप्रभु करेन ७/३१ | तैँहो कृष्णेर प्रकाश २/५८
ताँहार हृदये ताँर १/१०० | ताहार इयत्ता कहि ६/११५ | तैँहो दास्य-सुख मागे ६/४५
ताँहारा आपकाने करे ६/६५ | ताहार उपरिभागे ५/१६ | तैँहो ब्रह्मा हञा सृष्टि ५/१०३
ताँहाराओ आपकाने ६/७१ | ताहार 'कल्मष' नाम ३/६० | तैँहो भक्ति प्रचारिला ७/१६५
ताँहा सर्व लभ्य हय ५/२३१ | ताहार बाहिरे 'कारणार्णव' ५/५१ | तैँहो याँर दासी हैञा ६/६९
ताते जानि, मोते आछे ४/२६१ | ताहार ये आत्मा २/३६ | तैँहो रति-मति मागे ६/५६
ताम्बूलचर्वित यबे करे ४/२५४ | ताहार वैभव २/१०१, १०२ | तैछे इँह अवतार, सब २/७९
तार ऋण शोधिते ३/१०५ | ताहा शिखाइब लीला ४/२६५ | तैछे कृष्ण अवतार-भितरे २/८१
तार पापक्षय हय ३/६३ | ताहार श्रवणे नाश हय ७/१०९ | तैछे जगतेर कर्त्ता ५/६३
तार प्रेमे वश आमि ४/१८ | ताहारे निर्जिते भागवत २/६२ | तैछे जीवे गोविन्देर २/१९
तार मध्ये कृष्णचन्द्रेर २/६८ | ताहा हइते कोटिगुण ४/१२६ | तैछे परव्योमे नाना ५/३७
तार मध्ये मोक्षवाञ्छा १/९२ | ताहा हैते कोटिगुण ४/१८७ | तैछे सब अवतारेर कृष्ण २/९०
तार मध्ये ब्रजे नाना ४/८१ | ताहा हैते राधा-सङ्गे ४/२५८ | तोमाके देखिये यैछे ७/१०३
तार मध्ये श्रीराधार ४/४८ | तिँहो याँर अंश ५/४८ | तोमाके निन्दये यत ७/५१
तारा आसि' प्रभु-पाय ७/३६ | तिनसुख आस्वादिते हब ४/२६८ | तोमार ईश्वर-कृष्णे ६/५८
तारे कहे, केने कर २/७३ | तिनेर स्मरणे हय १/२१ | तोमार अर्थे २/८७
तारे से से भावे ४/१९ | तिलफुल-जिनि नासा ३/४४ | तोमार दर्शने सर्व २/४५
ता-सबा डुबाइते पातिब ७/३२ | तुमि कोन् बड़ लोक ४/२५ | तोमार नाभिपद्म हैते २/३२
ताहा आस्वादिते आमि ४/२६२ | तुमि ना देखिले २/४५ | तोमार प्रभावे सबार ७/१०५
ताहा आस्वादिते यदि ४/१२० | तुमि नारायण-शुन २/३५ | तोमार प्रेमेते आमि ७/९१
ताहाञि सकल लोक ७/१५८ | तुमि पिता-माता २/३२ | तोमार महिमा-कोटि ६/११५
ताहा छाड़ि' कर केने ७/६९ | तुमि मूल नारायण २/५६ | तोमार माधुरी देखि' ७/१०४
ताहा देखि' क्रुद्ध हञा ५/१६९ | तुमि यदि आइस, पूर्ण ७/५४ | तोमार वचन शुनि' ७/१०४
ताहा देखि' लोकेर हय ५/१६७ | तुमि ये खण्डिले अर्थ ७/१३५ | तोमार शक्तिते ताँरा २/४१
ताहा देखि' सुखे आमि ४/२५६ | तुरीय कृष्णेर नाहि २/५२ | तोमा-सबार सम्प्रदाये ७/६४
ताहाते आइला तैँहो ५/१६२ | तुरीय, विशुद्धसत्त्व ५/४८ | त्रिजगते इहार केह ४/१३८
ताहाते आपन भक्तगण ३/२८ | तृष्णाशान्ति नहे ४/१४९ |
ताहाते जानेन प्रभुर ४/१०५ | तैँह आसि' कृष्णरूपे २/७२ | द
ताहाते निमेष,-कृष्ण ४/१५१ | तैँह चतुर्भुज, इँह २/६१ | दण्डवत् हैया आमि ५/१८२
ताहाते प्रकट हैला ४/२७२ | तैँह तोमार प्रकाश २/५७ | दर्पणाद्ये देखि' यदि ४/१४४
पद्य-सूची | ४६५