श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंएसब-कृष्ण ]
एसब शुनिया प्रभु हासे ७/४३ | कलियुगे कृष्ण-नाम ३/५० | कृष्ण-आलिङ्गन पाइनु ४/२५२
ए सब सिद्धान्त २/१०८ | कलियुगे युगधर्म ३/४० | 'कृष्ण' एइ दुइ वर्ण ३/५३
ए सब सिद्धान्त गूढ़ ४/२३१ | कल्मष-द्विरद नाशे ३/३१ | कृष्ण एक सर्वाश्रय २/९४
ए सब सिद्धान्त शुन २/११६ | कहिबार योग्य नहे ५/२११ | कृष्ण-कर्त्ता, माया ताँर ५/६४
ए सब सिद्धान्त हय ४/२३४ | काम-अन्धतमः ४/१७१ | कृष्ण कहे, - 'आमि ४/१२१
एसब सिद्धान्ते सेइ ४/२३३ | कामगन्धहीन स्वाभाविक ४/२०९ | कृष्ण कहेन- "ब्रह्मा २/३४
ए-सबाके शास्त्रे कहे ६/९५ | काम, प्रेम,-दोँहाकार ४/१६४ | कृष्णकान्तागण देखि ४/७४
ए सबार दर्शनेते २/५२ | कामेर तात्पर्य-निज ४/१६६ | कृष्णकार्य करे विप्र ५/१७१
| कायमनोवाक्ये ताँर भक्ति ६/९० | कृष्णके कराइल नाना ५/१५२
ऐ | कायव्यूह करि' करेन ६/९३ | कृष्णके कराय ४/८१
ऐछे अवतरे कृष्ण ४/१२ | कायव्यूहरूप ताँर ४/७९ | कृष्णके कहये केह २/११३
ऐश्वर्यज्ञान-हीन, केवल ६/६१ | कार अवतार ? २/७९ | कृष्णके तुलसीजल ३/१०४
ऐश्वर्यज्ञानेते सब ४/१७ | कारण-समुद्र माया ५/५७ | कृष्ण, कृष्ण-अवतारेर ५/१५
ऐश्वर्यज्ञाने विधि भजन ३/१७ | कारणाब्धि-गर्भोदक २/४९ | 'कृष्ण' 'कृष्ण' कहे सबे ५/१९१
ऐश्वर्य-ज्ञाने सब ३/१६ | काशीते लेखक शूद्र ७/४५ | 'कृष्ण' 'कृष्ण' नाम सदा ७/१४९
ऐश्वर्य-शिथिल ३/१६, ४/१७ | काँहा आछे मही, शिर ५/११७ | 'कृष्ण' 'कृष्ण' बलिया ५/१८९
| कि कारणे आमा-सबार ७/६७ | कृष्ण-गुण-लीला गाय ६/७९
क | कि देखिनु, कि शुनिनु ५/१९८ | कृष्ण, गुरुद्वय, भक्त १/३२
कतेक शुनिब प्रभु ७/५० | किन्तु कृष्णेर येइ ४/९ | कृष्णदास-अभिमाने ये ६/४३
कण्ठे करि' एइ श्लोक ७/७५ | किन्तु कृष्णेर सुख हय ४/१९४ | कृष्णदास-भाव बिनु ६/७५
कनिष्ठ-भावे आपनाते ६/९७ | किबा रूप, गुण, लीला ५/१९३ | 'कृष्णदास हओ'-जीवे ६/४२
कभु असङ्गत नहे ७/१०५ | किबा मन्त्र दिला गोसाञि ७/८१ | कृष्णनाम उपदेशि' तार' ७/९२
कभु कोन अङ्गे देखि ५/१६६ | किम्बा, 'कान्ति'-शब्दे ४/९३ | कृष्णनाम-परायण, परम ५/२२८
कभु कृष्ण करे ताँर ५/१३६ | किम्बा, कृष्णपूजा ४/८४ | कृष्ण-नाम-प्रेम दिया ७/१६३
कभु गुरु, कभु सखा ५/१३५ | किम्बा, दोँहा ना मानिञा ५/१७७ | 'कृष्णनाम-महामन्त्रे एइ ७/८३
कभु मिले, कभु ना ४/३१ | किम्बा, प्रेमरसमय कृष्णेर ४/८६ | कृष्णनाम हैते पाबे ७/७३
कभु यदि एइ प्रेमार ४/१३५ | किम्बा, 'सर्वलक्ष्मी' ४/९१ | कृष्णनामे ज्ञानाच्छन्न ७/७९
कमलनयनेर तँहो, याते ६/३० | किशोरस्वरूप कृष्ण २/९९ | कृष्णनामे ये आनन्दसिन्धु ७/९७
'कमलाक्ष' बलि' धरे ६/३० | कृपा करि व्यास ३/८१ | कृष्णनामेर फल-'प्रेमा' ७/८६
करिब विविधविध ४/२७ | कृष्ण-अवतार हेतु ३/९१ | कृष्ण-निजशक्ति राधा ४/७१
करिबार कथा नहे ५/२१७ | कृष्ण अवतारिया यँहो ५/१४८ | कृष्णपादपद्म भावि' ३/१०७
करिया कल्मष नाश ३/६१ | कृष्ण अवतारे ज्येष्ठ ५/१५२ | कृष्णप्रेम दिया कैला ७/१६७
कर्त्तव्य अवश्य एइ ४/३५ | कृष्ण अवतीर्ण हैला ४/७ | कृष्णप्रेम-भावित याँर ४/७१
कलिकाले कैछे हबे ३/९९ | कृष्ण आदि नरनारी ४/१४७ | कृष्णप्रेमा सेइ पाय ७/१००
पद्य-सूची | ४६१