श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआमार-एइ ]
आमार सङ्गे राधा ४/२५५
आमारे ईश्वर माने ४/१८
आमा हइते आनन्दित ४/२३९
आमा हैते कोटिगुण ४/१३३
आमा हैते गुणी बड़ ४/२४१
आमा हैते यार हय ४/२४०
आमा हैते राधा पाय ४/२६२
आमि गोप, तुमि २/३४
आमि त' जगते बसि ५/८९
आमि यैछे परस्पर ४/१२७
आमिह ना जानि ४/३०
आर यत सब देख ७/८
आयाम, विस्तार, दुइ ५/९७
आर अद्भुत-चित्त १/१०१
आर अर्धे कैल ५/९८
आर एक अङ्ग ताँर ६/३६
आर एक अद्भुत गोपी ४/१८४
आर एक एक मूर्त्ये ६/२०
आर एक गोपीप्रेमेर ४/१९७
आर एक शुन ताँर ५/१५८
आर एक हेतु, शुन ४/६
आर दिने गेला प्रभु ७/५८
आर भागवत-भक्त १/९९
आर यत चैतन्य ४/२२८
आर यत सब, -ताँर ६/८१
आर येइ सुने, तार ७/११४
आर विशेषणे तार ३/५५
आर शुद्धभक्त कृष्ण ४/२०४
आर सब अवतार ४/१०
आर सब गोपीगण ४/२१७
आर सब परिषद ५/१४३
आराम, आवास, यज्ञ ५/१२३
आरे आरे कृष्णदास ५/१९५
आवेशे आपन भाव ४/१०९
आर्ष-विज्ञवाक्ये नाहि २/८६
आश्चर्य भाण्डार, प्रेम ७/२४
आश्रयजातीय सुख ४/१३४
आश्रय जानिते कहि २/९३
आसि' निवेदन करे चरणे ७/५३
आस्वादिते हय लोभ ४/१४४
इ
इच्छाय अनन्तमूर्त्ति ६/९
इच्छाय जगद्रूपे पाय ७/१२४
इथिमध्ये चन्द्रशेखर ७/४९
इत्थे किछु अपराध ना ६/११४
इथे भक्तभाव धरे चैतन्य ७/१२
इथे यत जीव २/४४
इदानीं द्वापरे तिँहो ३/३८
इहाँ आइस, गोसाँई ७/६३
इहाके कहिये कृष्णेर १/७०
इहा जानि' रामदासेर ५/१७४
इहार श्रवणे हय चैतन्य ७/१६८
इहा वड किबा सुख ४/२३६
इहा शुनि' बले सर्व ७/१०३
इहा शुनि रहे प्रभु ईषत् ७/५२
इहा हैते कृष्णे २/११७
इहाँ त' द्विभुज २/२९
इहाँ वेणु धरे, तिँहो २/२९
ई
ईश्वर-सारूप्य पाय ६/३१
ईश्वरस्वरूप भक्त १/६१
ईश्वरस्वरूप प्रणव ७/१२८
ईश्वरे अभेद, तेजि 'अद्वैत' ६/२५
ईश्वरेर 'अङ्ग', अंश ६/२३
ईश्वरेर अचिन्त्यशक्ति ७/१२७
ईश्वरेर अवतार १/६५
ईश्वरेर वाक्ये नाहि ७/१०७
ईश्वरेर शक्ति हय १/७९
ईश्वरेर शक्त्ये तबे हुये ६/१९
ईश्वरेर सेवा बिना नाहि ५/१२०
उ
उछलिल प्रेमवन्या ७/२५
'उठ', 'उठ' बलि' मोरे ५/१८३
उठि' ताँर रूप देखि' ५/१८३
उठिला संन्यासी सब ७/६१
उड़िया पड़िते चाहे, प्रेमे ४/२५३
उत्सवान्ते गेला तिँहो ५/१७२
उत्तम, अधम, किछु ५/२०८
उन्मत्त हइया नाचे, इति ७/८८
उन्माद, विषाद, धैर्य, गर्व ७/८९
उपनिषत्-सहित सूत्र ७/१०८
उपनिषद् कहे ताँरे २/१२
उपपुराणेह शुनि ३/८१
उपर्युधो व्यापियाछे ५/१८
'उपादान' अद्वैत करेन ६/१७
उपासना-भेदे जानि २/२७
उपेक्षा करिया कारो ना ७/४३
उपेक्षा करिया कैल मथुरा ७/४४
उलूके ना देखे ३/८५
उल्लास-उपरि लेखों ५/१६०
ए
ए अर्थ ना जानि' २/६०
ए नवेर उत्पत्ति २/९३
एइ आज्ञा पाञा नाम ७/७७
एइ एक, शुन आर ४/१३७
एइ एक हेतु, शुन २/३९
एइ चन्द्र सूर्य दुइ १/१०२
एइ चिन्ति' रहे कृष्ण ४/१३६
पद्य-सूची | ४५९