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सर्वकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

पृष्ठ 2540, कुल 2549 में से

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पृष्ठ 2540

[ स्व-हेन पद्य सूची 523
स्वभक्तेर गाढ़-अनुराग 2/168 | हरिदास आछिल पृथिवीर 11/97 | 'हरिभक्तिविलास'-ग्रन्थ कैला 4/221
स्वयं भगवान् कृष्णचैतन्य 2/67 | हरिदास कहे, — “आजि करिमु 11/18 | 'हरे कृष्ण' 'हरे कृष्ण' करि' 16/7
स्वरूप कहे, — “ऐछे अमृत 6/320 | हरिदास कहेन, — “केने करह 3/193 | हर्षे प्रभु कहेन, — “शुन, स्वरूप 20/8
स्वरूप कहे, — “तथापि मायावाद 2/98 | हरिदास कहेन, — “नामेर एइ 3/177 | हस्त हाले, मनोबुद्धि नहे 20/93
स्वरूप कहे, — “सिंहद्वारे 6/283 | हरिदास कहेन, — “यैछे सूर्येर 3/182 | 'हा राम, हा राम' बलि' 3/53
स्वरूप गोसाञि, आर राय 2/106 | हरिदास कृपा करेन ताँहार 3/169 | हासे, कान्दे, नाचे, गाय 18/44
स्वरूप-गोसाञि तारे पुछेन 18/45 | हरिदास ठाकुर—महाभागवत 7/46 | हाहा कृष्ण प्राणधन, हाहा 17/60
स्वरूप, देह, —चिदानन्द 5/122 | हरिदास ठाकुरे तुजि कैलि 3/200 | हा हा कृष्ण प्राणनाथ 12/5
स्वरूप— 'सूत्रकर्त्ता', रघुनाथ 14/10 | हरिदास-ठाकुरेर महोत्सवे 11/74 | हाहा श्यामसुन्दर, हाहा 17/60
'स्वरूपेर रघु' — आजि हैते 6/203 | हरिदास-द्वारा नाम-माहात्म्य 5/86 | हित-निमित्त आइलाङ आमि 4/140
स्वरूपेर सङ्गे पाइलूँ ए 7/45 | हरिदासे दिते गेला आनन्दित 11/16 | हुङ्कार करिया प्रभु तबहिँ 18/75
स्वहस्ते करेन मलमूत्रादि 8/26 | हरिदासेर अपराधे हैल असुर 3/145 | हृदय-उपरे धरौं, सेवा 20/58
स्वामी-आज्ञा पाले, —एइ 7/102 | हरिदासेर इच्छा यबे हइल 11/95 | हृदये धरिमु तोमार कमल 11/33
स्मरणेर काले गले परेन 6/290 | हरिदासेर कृपापात्र, ताते 3/166 | हृद्रोग-काम ताँर तत्काले 5/46
हरिदासेर कैल तेंह चरण 4/14 | हेनकाले 'गोपाल-वल्लभ'-भोग 16/88
ह | हरिदासेर पादोदक पिये भक्त 11/65 | हेन-चरण स्पर्श पाइल 12/29
हरिदासे समुद्र-जले स्नान 11/64 | हेन वंशे घृणा छाड़ि' 4/29
हंस-मध्ये बक येन किछु 5/129 | 'हरिबोल' 'हरिबोल' बलेन 11/68 | हेन 'रस' पान मोरे 5/76