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श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

पृष्ठ 1995, कुल 2549 में से

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पृष्ठ 1995

शब्दकोश उच्छिष्ट-छन्दविद्या ]
उ
उच्छिष्ट-खाकर छोड़ा हुआ, परित्यक्त
उत्कृष्ट-उन्नत, श्रेष्ठ
उद्बुद्ध-जगा या जगाया हुआ, विकसित
उद्भासित-व्यक्त, चमकता हुआ
उद्यत-तैयार
उद्रेक-प्रचुरता, बढ़ती
उद्वेग-क्षोभ, चित्तकी अस्थिरता
उपक्रम-योजना, आरम्भ, प्रयास
उपशम-विराग, विरक्ति
उपलक्षित-इशारेसे बताया हुआ
उपाङ्ग-छोटा या सहायक अंग
उपार्जित-कमाया हुआ
उपादान-साधन-सामग्री
उपादेय-ग्रहण करने योग्य, उपयोगी
उपेयत्व-उपाय-योग्य होनेका भाव
उरु-विस्तृत, महान
उरुक्रम-विष्णु
उरुगाय-उत्तम व्यक्तियोंके द्वारा जिसका
स्तुतिगान किया गया हो
ए
एकरस-जो सदा एक रूपमें रहे,
एकीभूत-जो मिलकर एक हो गया हो
ऐ
ऐहिक-सांसारिक
औ
औत्सुक्य-उत्सुकता
औद्धत्य-उद्धतता, अखड़पन
औपाधिक-उपाधियुक्त
क
कर्त्तृत्व-कर्ताका धर्म, कार्य
कलुषित-गंदा, कलुषयुक्त
कल्प-वेदका एक अङ्ग, ब्रह्माका एक दिन
कल्पवृक्ष-इच्छा पूरी करनेवाला वृक्ष
काम्यकर्म-फलकी कामनासे किया
जानेवाला कर्म
कैतव-छल, धोखा
केवला भक्ति-शुद्धा भक्ति
कैङ्कर्य-दासत्व
कैवल्य मुक्ति-निर्वाण मुक्ति
कौतूहलवश-उत्सुकतावश
क्रोड़ीभूत-अन्तर्भूत
क्लान्त-थका हुआ, क्षीण
क्ष
क्षिति-पृथ्वी
क्षेत्र-शरीर
क्षेत्रज्ञ-शरीरका ज्ञाता, आत्मा तथा
परमात्मा
क्षोभ-असन्तोष, व्याकुलता
ग
ग्रथित-गूँथा हुआ
ग्रन्थि-गाँठ
ग्रास-आहार
ग्रीवा-गर्दन
घ
घ्राण-गन्ध, सूँघनेकी शक्ति
च
चित्तगुहा-हृदयरूपी कन्दरा
चित्-शक्ति-भगवानकी एक प्रकारकी शक्ति
चिदालोचना-चित्-वस्तुकी आलोचना
चिन्तामल-चिन्तारूपी मल
चिन्मयत्व-चिन्मयता
चैतन्यत्व-चेतनता
चैतन्यनिष्ठ-चित्-वस्तुमें जिसकी निष्ठा है
चैतन्यहीन-चेतनारहित
छ
छन्दविद्या-अठारह विद्याओंमें एक
। 549