श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 1981, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्य सूची झारि-तुमि ]
झ ताँर भक्त्ये हय जीवेर 18/193 तार मध्ये प्रवेशये 22/96
'झारिखण्डे' स्थावर-जङ्गम 17/46 ताँर मुखे आन सुने 17/48 तार मध्ये मनुष्य-जाति 19/145
ताँर लागि' गोपीनाथ 16/33 तार मध्ये म्लेच्छ, पुलिन्द 19/145
ड ताँर शास्त्रयुक्त्ये ताँरे 18/187 तारे मध्ये 'स्थावर' 19/144
डुबिया रहिला प्रभु जलेर 18/137 ताँर सङ्गे अन्योन्ये, ताँर 18/220 तारा तैछे तोमा मारिबे 24/245
ताँर सूत्रेर अर्थ कोन 25/90 तारुण्यामृत-पारापार 21/113
त ताँर सेवा छाड़ि' आमि 15/48 तारे तिरस्करिवारे करिला 25/113
'तटस्थ'-लक्षणे उपजय 22/103 ताँर सेवा बिना जीवेर 18/194 तारे वध कैले, हय 15/261
तत्तत्कामादि छाड़ि' हय 24/91 ताँरे 'निर्विशेष' स्थापि 25/33 ताहा खण्डि 'सविशेष' 18/189
तथापि पुरी देखि' ताँर 17/180 ताँरे राधा-सम प्रेम कृष्ण 18/10 ताहा निस्तारिया कैला 25/165
तथापि वृक्ष नाहि जाने 15/173 ताँहा एकवाक्य ताँर 15/99 ताहा विघ्न करि वनपथे 17/74
तदेकात्मरूपे 'विलास' 20/184 ताहा छाड़ि' करियाछि 15/49 तँहो दण्डवत् कैल, प्रभु 19/62
'तदीय'-तुलसी, वैष्णव 22/122 ताँहा बिना एइ प्रेमार 17/173 तँहो दुइ बहिर्वास-कौपीन 20/78
'तपस्वी' प्रभृति यत 24/210 ताँहा बिना एइ राज्य 16/6 तिँहो ये कहये वस्तु 25/57
तबु वृन्दावन याह' लोक 16/281 ताँहा विस्तारित हञा 19/155 तँहो रहु-सर्वज्ञ-शिरोमणि 21/14
तबे ताँरे कहे प्रभु चापड़ 18/100 ताँहा यमुना, गङ्गा 16/280 तिन आवास-स्थान कृष्णेर 21/42
तबे तुमि आमा-पाश 16/240 ताँहार चरणे प्रीति 18/194 तिनकाले सत्य तिँहो 24/71
तबे महत्तत्त्व हैते त्रिविध 20/276 ताँहार महिमा-प्रताप ना 17/106 तिनबारे 'कृष्णनाम' ना 17/127
तबे मिश्र पुरातन एक 20/78 ताँहारे जानिह तुमि 16/74 तिन मुद्रार भोट गाय 20/92
तबे मुक्ति पाइले अवश्य 24/134 ताँहा स्तम्भ रोपण कर 16/115 तिन साधने भगवान् तिन 24/76
तबे मूलशाखा बाड़ि' याय 19/161 ताँहा सेइ कल्पवृक्षर 19/163 तिने आज्ञाकारी कृष्णेर 21/36
तबे याय तदुपरि 'गोलोक 19/154 ताते कृष्ण भजे, करे 22/25 तिने 'भेद' नाहि,-तिन 17/131
तबे रामानन्द, आर सत्यराज 15/102 ताते छय दर्शन हैते 25/55 तिनेर अधीश्वर कृष्ण-स्वयं 21/92
तबे सूत्रेर मूल अर्थ 25/91 ताते बड़, ताँर सम 21/34 तिनेर तिनशक्ति मेलि' 20/254
तबे सेइ जीव 'साधुसङ्ग' 23/9 ताते भासे माया, लज्जा 15/176 तीर्थ 'लुप्त' जानि', प्रभु 18/5
ताँर इच्छाय गेल मोर 20/93 ताते माली यत्न करि' 19/157 'तुमि आमाय आनि' 18/153
ताँर उपदेश-मन्त्रे पिशाची 22/15 ताते लीला 'नित्य' कहे 20/393 तुमि-ईश्वर, नाहि तोमार 17/182
ताँर कृपाय प्रश्न करिते 20/94 तावत् रहिब आमि 15/289 तुमि एक जिन्दापीर 20/5
ताँर ज्ञाने आनुषङ्गे याय 20/144 तार एकदेशे वैकुण्ठज 21/29 तुमि केने एत दुःखी 20/128
ताँर नाभिद्म हैते उठिल 20/287 तार एक फल पड़ि' 15/173 तुमि जान, कृष्ण निज 16/144
ताँर प्रेम-वश आमि 15/49 तार एक राइ-नाशे 15/177 तुमि त' ईश्वर, तोमार 25/88
ताँर प्रेमे आनि' आमाय 15/65 तार तले पिँड़ि-बान्धा 18/76 तुमि देखा पाबे, आर 15/46
ताँर वाक्य, क्रिया, मुद्रा 23/35 तार मध्ये आवेशे प्रभु 17/26 तुमि वक्ता भागवतेर 24/310
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