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सर्वकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

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पृष्ठ 1422

[ यहाँ-लक्ष्मी श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत
याहाँ याहाँ प्रभुर चरण 1/165
याँहार सर्वस्व, ताँरे मिले 8/309
याँर सौभाग्य-गुण वाञ्छे 8/182
याँहा लञा याय, ताँहा 11/37
याहाँ सङ्गे चले एइ 1/224
याज्ञिक-ब्राह्मणी सब 12/32
यादवेर विपक्ष, यत 13/156
यावत् पड़ौं, तावत् पाङ 9/101
यारे जानाह, सेइ जाने 9/126
याँरे ताँर कृपा, सेइ 13/59
यारे देखे, तारे कह 7/101
याँहा इच्छा, याह, आमा 10/65
याँहार महिमा सर्वशास्त्रेते 8/97
याहा लागि' मदनदहने 1/55
याहा हैते हय कृष्णे 9/307
येइ कृष्णतत्त्ववेत्ता, सेइ 8/127
येइ ग्रामे रहि' भिक्षा 7/106
येइ भट्टाचार्य पड़े पड़ाय 6/278
येइ मतनाचाओ, सेइ 8/131
येइ येइ कहे, सेइ 12/113
ये इहा एकबार पिये 8/305
ये-काले करेन जगन्नाथ 1/53
ये-काले निमाञि पड़े 3/166
ये काले वा स्वप्ने 2/37
ये तोमार माया-नाटे 8/198
ये तोमारे राज्य दिल 1/176
ये ना वाञ्छे, तार 4/146
ये मदन तनुहीन, परद्रोहे 2/22
ये यैछे भजे, कृष्ण 8/90
योगपट्ट ना निल, नाम 10/108
योग्यपात्र हय गूढरस 1/74
र
रत्नगण-मध्ये यैछे 4/193
रथयात्रा देखि' ताँहा 1/47
रथयात्राय आगे यबे 1/54
रन्धने निपुणा ताँ-सम 9/298
'रस'-कोन् तत्त्व, 'प्रेम' 8/118
रसज्ञ कोकिल खाय 8/257
'रसराज', 'महाभाव'-दुइ 8/281
रसामृतसिन्धु, आर विदग्ध 1/38
राक्षसे स्पर्शिल ताँरे 9/189
रागमार्गे भजि' पाइल 8/222
रागानुग-मार्गे ताँरे भजे 8/220
राजवेश, हाती, घोड़ा 1/79
राजा कहे,-उपवास 11/111
राजा कहे,-शास्त्र-प्रमाणे 11/101
राजा कहे,-शुन, मोर 1/180
राज्य छाड़ि' योगी हइ' 12/10
राज्यभोग নহে चित्ते बिना 12/20
रात्रि-दिन कुञ्जे क्रीड़ा 8/188
रात्रि-दिन चिन्ते 8/227
राधाकृष्ण-कुञ्जसेवा साध्य 8/204
राधाकृष्णपदाम्बुज-ध्यान 8/252
राधाकृष्ण-प्रेमकैलि कर्ण 8/254
राधाकृष्णे तोमार महाप्रेम 8/276
राधाकृष्णे प्रेम याँर, सेइ 8/246
राधाकृष्णेर प्रेमकैलि-येइ 8/249
राधाकृष्णेर लीला एइ अति 8/200
राधा चाहि' वने फिरे 8/104
राधा-प्रति कृष्ण-स्नेह 8/165
राधा-प्रेमावेशे प्रभु हैला 14/235
राधार कुटिल-प्रेम हइल 8/109
राधार स्वरूप-कृष्णप्रेम 8/208
राधा लागि' गोपीरे यदि 8/102
राधिका-उन्माद यैछे 1/87
राधिकार भावकान्ति करि' 8/278
रामानन्द आइला अपूर्व 8/17
रामानन्द-चरित्र ताहे 8/303
रामानन्द-मिलन-लीला 8/311
'रामानन्द राय' आछे 7/62
रामानन्द राये मोर कोटी 8/310
राय कहे,-आमि-नट 8/131
राय कहे,-आमि शुद्र 10/54
राय कहे,-इहा आमि 8/120
राय कहे,-इहार आगे 8/96
राय कहे,-इहा वइ बुद्धि 8/190
राय कहे,-कान्तभाव प्रेम 8/79
राय कहे,-कृष्ण-कर्मार्पण 8/59
राय कहे,-कृष्णभक्ति-बिना 8/244
राय कहे,-'कृष्ण हय 8/186
राय कहे,-चरण-रथ 11/37
राय कहे,-ज्ञानमिश्रा भक्ति 8/64
राय कहे,-ज्ञानशून्या भक्ति 8/66
राय कहे,-दास्य-प्रेम 8/71
राय कहे,-प्रभु तुमि 8/277
राय कहे,-प्रेमभक्ति-सर्व 8/68
राय कहे,-येइ कहाओ 8/197
राय कहे,-स्वधर्माचरणे 8/57
रावण आसितेइ सीता 9/194
रावण देखिया सीता लैल 9/203
रावण हैते अग्नि कैल 9/203
रावणेर आगे माया-सीता 9/194
रास ना पाइल लक्ष्मी 9/120
रासलीला-वासनाते राधिका 8/112
ल
लक्षणा' करिते स्वतः 6/137
लक्ष्मी-आदि नारीगणेर 8/144
लक्ष्मीकान्तादि अवतारेर 8/144
लक्ष्मी केने ना पाइल 9/122
578 ।