श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 1419, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्य सूची पञ्च-प्रभु ]
प
पञ्चपाण्डव तोमार पञ्चपुत्र 10/53
पञ्चविध मुक्ति त्याग 9/267
पञ्चविध मुक्ति' पाञा 9/257
पट्टडोरी लञा आइसे 14/253
पड़िछा मारिते तैं हो 6/5
पतिव्रता-शिरोमणि जनक 9/202
पथबान्धा ना याय 1/160
पथ साजाइल मने करिया 1/155
परम ईश्वर कृष्ण-स्वयं 8/133
परम पुरुषोत्तम स्वयं 14/220
परम-विरक्त, मौनी, सर्वत्र 4/179
परमार्थ थाकुक्, लोके 12/24
पराइल मुक्ता नासाय 5/132
परात्मनिष्ठा-मात्र वेष 3/8
परिणाम-वाद'-व्याससूत्रे 6/170
परिपूर्ण-कृष्णप्राप्ति एइ 8/88
परिहास करियाछि ताँरे 7/66
परीक्षा करिया शेषे हैल 4/189
पहिले देखिलुँ तोमार 8/267
“पहिलेहि राग नयनभङ्गे 8/193
पाछे आमि करिब अर्थ 6/188
पाछे श्याम-वंशीमुख 6/203
पाण्डित्य आर भक्तिरस 7/65
पाण्डित्याद्ये ईश्वरतत्त्व-ज्ञान 6/87
पापराशि दहे नामाभासेइ 1/194
पापी-नीच उद्धारिते ताँर 11/45
पिठा-पाना, अमृत-गुटिका 12/167
पुँथि पाञा प्रभुर हैल 9/238
पुत्रसम स्नेह करेन 9/298
पुनः कहे, - शीघ्र चल 6/150
पुनरपि एइ ठाञि पाबे 7/129
पुराण-वाक्ये सेइ अर्थ 6/148
पुरी-गोसाञिर आज्ञाय 10/132
पुरीर वात्सल्य मुख्य 2/78
पुरुष, योषित्, किबा 8/138
पुरुषोत्तम आचार्य ताँर 10/103
पुष्प-सम कोमल, कठिन 7/72
पूर्व-पूर्व-रसेर गुण 8/85
पूर्वे आसियाछिला तैं हो 9/295
पूर्वे उद्धव-द्वारे, एबे 13/139
पूर्वे प्रभु मोरे प्रसाद 11/116
पूर्वे विद्यानगररे दुइ त' 5/10
पूर्वे माधव-पुरीर लागि' 4/20
पूर्वे यैछे कुरुक्षेत्रे सब 13/124
पृथिवीते रसिक भक्त नाहि 7/64
प्रगाढ़-प्रेमेर एइ स्वभाव 4/186
प्रणव' ये महावाक्य 6/174
प्रणव हैते सर्ववेद 6/174
प्रणय-मान-कञ्चुलिकाय 8/168
प्रतापरुद्र छाड़ि' करिबे 11/46
प्रतिवर्षे आइसे, सङ्गे रहे 1/256
प्रतिमा चलिञा आइला 5/110
प्रतिमा नह तुमि 5/96
प्रतियुगे करेन कृष्ण 6/100
प्रतिष्ठार भये पुरी रहे 4/147
प्रतिष्ठार स्वभाव एइ 4/146
प्रथम वत्सरे अद्वैतादि 1/46
प्रथमे मिलिला नित्यानन्द 1/183
प्रवेश करिते नारि,-स्पर्शि 9/363
प्रभावे वैष्णव' कैल सब 9/68
प्रभु-आज्ञा-प्रसाद-त्यागे 11/114
प्रभु-आज्ञाय कैल याहाँ 1/25
प्रभु-अज्ञाय भक्तगण 1/49
प्रभु कहे, - आमि मनुष्य 12/50
प्रभु कहे, - “एत तीर्थ 9/356
प्रभु कहे, - एथा मोर 9/332
प्रभु कहे, - एहो उत्तम 8/76
प्रभु कहे, - एहो बाह्य 8/59
प्रभु कहे, - एहो हय 8/71
प्रभु कहे, - कभु तोमार 7/147
प्रभु कहे, - कर्मी, ज्ञानी 9/276
प्रभु कहे, - कृष्णे तोमार 10/179
प्रभु कहे, - कृष्णेर एक 9/127
प्रभु कहे, - कोन् विद्या 8/244
प्रभु कहे, - गीता-पाठे 9/102
प्रभु कहे, - “तथापि राजा 11/10
प्रभु कहे, - तुमि कि 6/188
प्रभु कहे, - तुमि कृष्णभक्त 11/26
प्रभु कहे, - तुमि महाभागवत 8/44
प्रभु कहे, - तोमा स्पर्शि 11/189
प्रभु कहे, - पूर्ण यैछे 12/53
प्रभु कहे, - पूर्वाश्रमे तैं हो 9/301
प्रभु कहे, - भट्ट, तोमार 9/111
प्रभु कहे, - भट्टाचार्य, ना 6/184
प्रभु कहे, - मायावादी आमि 8/123
प्रभु कहे, - 'मुक्तिपदे'-इहा 6/262
प्रभु कहे, - मूर्ख आमि 6/126
प्रभु कहे, - मोरे देह' 12/167
प्रभु कहे, - विष्णु' विष्णु' 10/182
प्रभु कहे, - शास्त्रे कहे 9/258
प्रभु कहे, - साधु एइ 3/7
प्रभु कहे, - सूत्रेर अर्थ 6/130
प्रभुकृपा बिना मोर 12/9
प्रभुके कृष्ण जानि' कर 6/199
प्रभुके जानिल, - साक्षात् 6/280
प्रभुके ये भजे, तारे 7/110
प्रभु चतुर्भुज-मूर्त्ति ताँरे 10/33
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