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श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary

भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished696 पृष्ठ

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जगह उपसंहार किये जाने का निराकरण । प्रिय-
शिर आदि गुणों की अपेक्षा आनन्द आदि गुणों की
विलक्षणता का निरूपण । प्रियशिर आदि गुणों का
प्रयोजन वर्णन । प्रियशिर आदि गुणों की अब्रह्मता
का वर्णन । परमात्मा के आनन्द गुण का
वर्णन । आनन्द आदि गुणों की परमार्थधर्मता
का निरूपण । —पृ० ६८३-८६,
५. कार्याख्यानाधिकरण [सूत्र १८]
भोजन के पूर्व और उत्तर काल में आचमनीय जल
की प्राणवासना का निरूपण । —पृ० ६८६-६१,
६. समानाधिकरण [सूत्र १६]
अग्नि रहस्य और बृहदारण्य की शाण्डिल्य विद्या
की एकता का निरूपण । —पृ० ६६१-६२,
७. संबंधाधिकरण [सूत्र २०-२२]
ब्रह्मोपासना के अंग "अहः और अहम्" इन दो नामों
की प्रयोजनीयता निरूपण । स्थान भेद से उक्त दोनों
के पृथक प्रयोग का निरूपण । श्रुति द्वारा स्वाभिमत
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