श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)
Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary
भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा
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आदि शास्त्रों के साथ पांचरात्र शास्त्र का अविरोध
ज्ञापन। उक्त शास्त्र की स्वाभिमत स्वीकृति । —पृ० ८०८-१६,
(तृतीय पाद)
१. वियदधिकरण [सूत्र १-६]
१. पूर्वपक्ष-आकाश की अनुत्पत्ति का संशय ।
२. (सिद्धान्त)-आकाश की उत्पत्ति का समर्थन तथा
आकाशोत्पत्ति बोधक श्रुति की गौणार्थता के संशय
का निराकरण ।
३. पूर्वपक्ष-ब्रह्म शब्द की तरह “संभूत” शब्द के गौण
मुख्य दोनों ही अर्थों का समर्थन ।
४. (सिद्धान्त)-एक विज्ञान से समस्त विज्ञान की प्रतिज्ञा
के आधार पर आकाशोत्पत्ति के सिद्धान्त का श्रौत
शब्दों से ही समर्थन । जन्य पदार्थ मात्र की ब्रह्म
कार्यता का समर्थन । आकाशोत्पत्ति से वायु की
उत्पत्ति का वर्णन तथा सद्ब्रह्म की अनुपपत्ति का
निरूपण । —पृ० ८११-२६,
२. तेजोधिकरण (सूत्र १०-१७)
१. पूर्वपक्ष-शुद्ध वायु से तेजोत्पत्ति की शंका, तेज से
जलोत्पत्ति की शंका, जल से पृथिवी उत्पत्ति की शंका
श्रौत “अन्न” शब्द के पृथिवी परक अर्थ का हेतु
प्रदर्शन ।
१. (सिद्धान्त)-आकाशादि शरीरधारी ब्रह्म से वायु आदि
की उत्पत्ति का समर्थन, ब्रह्म से साक्षात् आकाश
आदि की उत्पत्ति का प्रतिपादन । इन्द्रिय और मन
की उत्पत्ति के आधार पर ब्रह्म की साक्षात् कारणता
का समर्थन । स्थावर जंगम सभी पदार्थों की ब्रह्म
शब्द की मुख्यार्थता प्रदर्शन । —पृ० ८२६-३२,
३. आत्माधिकरण (सूत्र १८)
१. पूर्वपक्ष-आकाश आदि की तरह जीवोत्पत्ति की शंका