स्पन्दनिर्णय एवं स्पन्दकारिका (आचार्य क्षेमराज - काश्मीर शैव स्पन्द-शास्त्र सान्वय सटीक)
Spanda Nirnaya of Acharya Kshemaraja with Hindi Commentary
आचार्य वसुगुप्त / क्षेमराज द्वारा
पृष्ठ 11, कुल 519 में से
संदर्भ में पढ़ें१० स्पन्दकारिका
[ ४ ] शिव और शक्ति ५०
शिव की शक्तियाँ ५१
स्वातन्त्र्यवाद ५२
[ ५ ] जीवतत्त्व ५२
आत्मा पर चढ़े हुए पंचावरण एवं वाग्योग ५३
[ ६ ] सृष्टिविधान जगत् का उपादान ५७
शब्दसृष्टिवाद ५९
[ ७ ] साधनान्तर्गत आत्म चैतन्य की विविध अवस्थायें एवं मोक्ष के उपाय ६२
[ ८ ] बन्धन और मुक्ति ७८
[ ९ ] अद्वैत भक्ति ७९
[ १०] मन्त्रविज्ञान और स्पन्दशास्त्र ८२
मन्त्र और आत्मबल की प्राप्ति का अन्तर्सम्बन्ध ८४
अवस्थाएँ, शून्य विषुव, ९ चक्र, मन्त्रार्थ, अहं ८७
[११] मन्त्र और नाद ८८
मन्त्र के अङ्ग ९१
मन्त्र और उसके विभिन्न अर्थ ९२
मन्त्र शक्ति एवं उसका स्वरूप ९६
ग्रन्थ खण्ड
स्पन्दकारिका
१. स्पन्दकारिका का अध्यायीकरण २
२. सूत्रों की अनुक्रमणिका ३
३. विशेष ध्यातव्य ५
प्रथम निष्यन्द—स्वरूपस्पन्द निष्यन्द ६
इच्छासृष्टिवाद ७, संकल्पसृष्टिवाद ८, अनेकात्मकता एवं एकात्मकता
में सामरस्य ८, जड़चेतन अभेदवाद ९, शक्ति-शक्तिमान में
अभेदात्मकता ९, सर्वात्मवाद १०, स्पन्द-सिद्धान्त ११, स्पन्द
नामकरण ११, स्पन्दशास्त्र का विषय एवं स्वरूपस्पन्द शब्द की
सोद्देश्यता ११, स्वरूपस्पन्द नामकरण की सार्थकता १२, शिव
विश्वात्मा १३, स्वरूपस्पन्द १५
स्पन्दकारिका के प्रतिपाद्य विषय
१. शक्ति-विशिष्ट शङ्कर की वन्दना १८
२. स्पन्द तत्त्व का स्वरूप ५५