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स्मृतिचन्द्रिका: व्यवहारकाण्ड (देवण्णभट्ट - दक्षिण भारत का मूर्धन्य न्याय-दर्शन महाग्रन्थ)

Smritichandrika: Vyavaharakanda of Devannabhatta

देवण्णभट्ट (सम्पादक: एल. श्रीनिवासाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished474 पृष्ठ

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पृष्ठे. पङ्क्तौ. अशुद्धम्. शुद्धम्.
318 14 पैतृकैब्राह्मणै पैतृकैः ब्राह्मणैः
320 17 एममुक्ता एवमुक्ता
342 10 देवपूर्व देवपूर्वं
357 8 पीतशेशं पीतशेषं
357 8 पिभेत् पिबेत्
360 16 हति इति
364 1 स्वयं चा स्वयं वा
364 17 दाषे दोष
365 20 महीं महीँ
372 15 पितामहपितृ पितामहस्य पितृ
373 9 शाण्डित्यौ शाण्डिल्यौ
373 12 षिण्डानुमन्त्रण पिण्डानुमन्त्रण
373 12 पितृयज्ञ पिण्डपितृयज्ञ
423 12 मृतामहे मृताहे
424 19 युपदेकदा युगपदेकदा