सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

पृष्ठ 718, कुल 723 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 718

६१६ गोलाध्याये
श्लोकः अध्यायः श्लोकसंख्या पृष्ठः
यो हि प्रदेशो ८ १६ २८९
योऽभ्युदेति समयेन ८ २४ २९५
र
रविचिह्नस्य च्छाया १२ ४ ४१६
रसपूर्णं तच्चक्रं १२ ५१ ४८६
रसगुणपूर्णंमही १४ ५८ ५९१
राशेर्यस्य निरक्षजोदय ८ ३१ ३०९
राहुः कुभामण्डलगः ९ १० ३३०
राश्यादेविकला १४ १८ ५५७
राशयः खं० लवाः १४ २२ ५६५
ल
लम्बनं बत २ ९ १९
लङ्का कुमध्ये ३ १७ ५६
लवणजलधिरादौ ३ २२ ६०
लङ्कादेशाद्धिमगिरि ३ २६ ६५
लङ्का पुरेऽर्कस्य ३ ४४ ७९
लङ्कोदये स्युर्न ४ २० १४२
लम्बाधिका क्रान्ति ८ ७ २७७