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सर्वकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

पृष्ठ 650, कुल 723 में से

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or ङ्ग; clearly त्र्यङ्गद्रिभिः).

Line 26:
ग्निभि ३९४४७९३७५ विभज्य शेषमहर्गणो जातः खखाभ्रदिक्संमितः १००००।
Wait: "ग्निभि" - is there a visarga?
Look at line 26: "ग्निभि ३९४४७९३७५" - no visarga on 'ग्निभि' or is there? It just says 'ग्निभि ३९४४७९३७५'.
Then: "विभज्य शेषमहर्गणो जातः खखाभ्रदिक्संमितः १००००।"
Let's check the number: ख (0) ख (0) अभ्र (0) दिक् (10) = 10000! Exactly १००००!

Line 27:
जातः कुजदिने। द्विगुणे हरे क्षिप्ते जातः सोमवारसे ७८८९६८७५०। त्रिगुणे
Wait, look at: "सोमवारसे" or "सोमवासरे"?
Look at the letters:
स ो म व ा स र े or स ो म व ा र स े?
Look closely at line 27:
"सोमवासरे" or "सोमवारसे"?
Wait! It has:
स (sa)
ो (o)
म (ma)
व (va)
ा (aa