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सर्वकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

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..."
Wait: during the day, does moonlight reveal anything?
"...प्रखरं तेजोऽपसार्य प्रतिबिम्बभागस्य चक्षुषा सह संयोगयोग्यत्वेन स्वाभिव्यक्तिजननार्हत्वात् ।"
Wait, is it "अन्तर्-स्थितमन्धकारं"?
Let's check if the word is "अन्धकारं":
Look at the letters after "चन्द्रकरस्यान्तर्-":
Letter 1: 'स्'
Letter 2: 'थ' with 'ि' = 'स्थि'
Letter 3: 'त'
Letter 4: 'म'
Letter 5: 'प्र' or 'भ' or 'ध्व'?
Wait, look at the next word: "प्रतिहत्य"!
Wait, what is "प्रतिहत्य"?
Who destroys what? Or striking what?
"प्रखरं तेजोऽपसार्य"?
Wait, could it be:
"चन्द्रकरस्यान्तर्-"
"-स्थितस्तमःप्रसारं प्रतिहत्य"? No, 'व्यापारं'!
Look at: 'व-्-य-ा-प-ा-र-ं' -> that is clearly 'व्यापारं'!
Now what is before 'व्यापारं'?
There is: 'म' + 'घ'? 'म' + 'ध'? 'म' + 'भ'?
Wait, look at:
"स्थितम" - then a letter that looks like 'भ' with a bar? Or 'स्व'?