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सर्वकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

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पृष्ठ 381

त्रिप्रश्नवासना २७९
केदारदत्तः—दिन-रात्रि की परमाधिकता और परम लघुता—क्योंकि मात्र
उन्मण्डल ही वहाँ एक क्षितिज वृत्त है ।
जहाँ जिन देशों या नगरों के अक्षांश ६६° से अधिक होते हैं वहाँ पर दिन रात्रि-
मान में विशेषता होती है । जब तक क्रान्ति, लम्बांश से अधिक रहेगी तब तक उन देशों
में सदा दिनमान सूर्य दर्शन रहेगा उत्तरगोल में । तथा जब तक लम्बांश से अधिक क्रान्ति
के दक्षिण गोल के प्रदेशों में ग्रह की स्थिति रहेगी तब तक दक्षिण गोल के उन देशों के
नगरों में रात्रि ही होगी ।
उपपत्तिः—उदाहरण द्वारा समझाया जा रहा है ।
जिस देश में अक्षांश = ७० तो उस देश में लम्बांश = ९०-७० = २०° । उस देश में
निरक्ष क्षितिज वृत्त दक्षिण क्षितिज से २०° ऊपर और उत्तर क्षितिज से २०° नीचे
लगा रहेगा ।
जिस समय सूर्य की क्रान्ति २०° के तुल्य होगी उस समय उत्तर क्षितिज में अर्द्धो-
दित रवि बिम्ब होकर, मध्याह्न में दक्षिण क्षितिज से ऊपर याम्योत्तर वृत्त में रवि ४०°
उन्नत रहेगा । अतः उस समय १५ + १५ = ३० दिनार्ध अतः दिनमान = ६० घटी
होता है ।
∴ रात्रि मान = ०
इसी के द्वितीय दिन में क्रान्ति की बर्द्धमान स्थिति में सूर्य उत्तर क्षितिज का स्पर्श
नहीं करेगा । इस प्रकार परम क्रान्ति तुल्य सूर्य की स्थिति में इस प्रकार मिथुनान्त क्रान्ति
१२° + ८° + ४° = २४° में सूर्य उत्तर क्षितिज से ४ अंश ऊपर-ऊपर ही भ्रमण करेगा,
पुनः इसी क्रम से परमोत्तरा क्रान्ति की अपचीयता में सूर्य अवरोहण अस्त क्षितिज की
ओर जावेगा अतः २० अंश तुल्य क्रान्ति तक सदा सूर्य दर्शन होगा तब तक दिन ही
रहेगा । तथा दक्षिणगोल में तब तक सूर्य के क्षितिज से नीचे रहने तक सदा दक्षिण गोल
में रात्रि होगी ।
इस प्रकार मेरु = ध्रुव का अक्षांश = ९० लम्बांश = ९०-९० = ० शून्य अतः मेरु
में भूपरिधि = ० बिन्दु मात्र भूपरिधि से ध्रुव स्थान में भूपरिधि का अभाव । ध्रुव केन्द्र
से ९० अंश की दूरी पर ध्रुव का क्षितिज होने से मेष-वृषभ मिथुनान्त सूर्य में ध्रुव में
१५ घटी = ३ महीने तथा कर्क-सिंह-कन्यान्त में ध्रुव में सूर्यास्त होने से १५ घटी = ३
महीने मध्याह्न से सूर्यास्त का समय = ३० घटी = ६ महीने का दिन उत्तर ध्रुव में
होगा । तथा तुलादि से मीनान्त ६ महीने तक जब सूर्य रहेगा तो दक्षिण ध्रुव के क्षितिज
के ऊपर दक्षिण ध्रुव में दिन रहेगा तो उत्तर ध्रुव में रात्रि रहेगी । गोल दर्शन से
स्पष्ट है ।