सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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(५ × ३)² = ६४
६४ - ६० = ४ = (५ - ३) = २ का वर्ग = ४ होता है ।
एक उदाहरण है कि, भु + को + क = ४० तथा भु ० × को ० = १२०
उक्त नियमों से ( भु × को ) × २ = १२० × २ = २४० = ( भु + को )² +
कर्ण = योग और अन्तर के गुणनफल के तुल्य । अतः २४०/४० = ६ = अन्तर
संक्रमण गणित से ४० ± ६ = ४६, ३४ के आधे = २३ = भु + को, और १७ = कर्ण ।
अतः (भु + को)² = ५२९ में भु × को × ४ = १२० × ४ = ४८० को घटाने से
५२९ - ४८० = ४९ का मूल = ७ = भु० को० का अन्तर । अतः संक्रमण से २३ ± ७
३० और १६ दोनों आधे के १५ तुल्य कोटि और ८ के तुल्य भुज हो जाता है ।
और भी एक प्रश्न है कि, यदि भु + को + कर्ण = ५६ तथा भु × को × क = ४२००
है तो भु, को और कर्ण के मान क्या हैं ? यहाँ पर कर्ण का मान अव्यक्त "य" मानकर
गणित करने से कर्ण का वर्ग = य² = भु² + को² = वर्ग योग । भु + को + क = ५६,
अतः ५६ - य² = भु + को = ५६ - य, (भु × को × क) / क = भु × को । ४२०० / य पूर्व सूत्र से
वर्ग योग = य² । और युति वर्ग = यु० व० - य² - ११२ य + ३१३६
चूंकि वर्ग योग = य² और दो राशियों भु + को = योग का वर्ग = युति² =
(५६ - य) ३१३६ - ११२ य + य² । दो राशियों का द्विगुणित घात (४२०० × २) / य
= ८४०० / य के तुल्य है । अतः, ३१३६ - ११२ य - य² = ८४०० / य । दोनों पक्षों से ११२
से भाग देने से भी दोनों पक्ष बराबर हैं । अतः २८ - य² = - ७५ दोनों