सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिप्रश्नवासना २७३
उपपत्तिः—क्षेत्र देखिये
ख त थ पू = पूर्वापर वृत्त
नि. पू. स = विषुवद्वृत्त
प च द = व क्षितिज वृत्त
म र घ = निरक्ष क्षितिज वृत्त
स घ ख नि थ = याम्योत्तर वृत्त
चर = मेषान्त कुज्या = कन्यादि कुज्या } उत्तर गोल में
स्वह = वृषान्त कुज्या = सिंहादि कुज्या } अहोरात्र वृत्त में
प म = मिथुनान्त कुज्या = कर्कादि कुज्या }
पू र = मेषान्त क्रान्ति चाप = क्रान्ति चाप की ज्या = क्रान्ति ज्या तथा = चर
= कुज्या ।
पू ह = वृषान्त क्रान्ति चाप की ज्या = क्रान्ति ज्या = स्वह = कुज्या
पू म = मिथुनान्त क्रान्ति चाप की ज्या = क्रान्ति ज्या तथा प म = कुज्या अहोरात्र
वृत्त में ।
९०—क्रान्ति चाप = द्युज्या की ज्या = द्यु ।
ध्रुव से, ध्रु म, ध्रु ह, ध्रुर = द्युज्या चाप की ज्या = द्यु अहोरात्रवृत्त सभी के चर =
चर, स्वह, और पम ।
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