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सर्वकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

पृष्ठ 348, कुल 723 में से

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पृष्ठ 348

ki = Cancer, Karka)!
"राशित्रयान्तरेऽस्मात् कर्क्यादिरनुक्रमान् मृगादिश्च ।"
Yes! Cancer is कर्क or कर्की (कर्क्यादिः)!
Look at the glyph in line 33:
क, then क with a subscript? No, it's क, then क? Wait, is it क + र् + क + ्य? No, it looks like 'कर्कदिर' or 'कर्क्यादिर'. Wait, let's look at the letters:
क, then what? It is 'क' with 'दि'? No, "कर्क्यादिर"?
Wait, look at line 33:
"राशित्रयान्तरेऽस्मात्ककदिरनुक्रमान्मृगादिश्च ।"
Wait, the letters are:
क (ka)
क (ka) - wait, is it 'र्क'? There is a tiny dot/repha?
द (da) + ि (i) = दि
र (ra)
न (nu) + ु = नु
क (kra) + ् + र = क्र
म (ma) + ा + न् = मान्
म (mṛ) + ृ = मृ
ग (gā) + ा = गा
द (di) + ि = दि
श (śa) + ् + च = श्च
So "कर्कदिरनुक्रमान्मृगादिश्च" or "ककदिर