सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसिद्धान्त दर्पण दो प्रकार से उपयोगी
है। इसमें पाठ्यपुस्तक की तरह अब तक के
सभी ज्योतिष ग्रन्थों का संकलन है तथा
विवादित मतों का समाधान है। अतः एक ही
ग्रन्थ पढ़ने से सभी ग्रन्थों के पढ़ने का लाभ
होगा। दूसरा लाभ यह है कि इसके लेखक
श्रीचन्द्र शेखर सामन्त ने यद्यपि सभी
गणनाओं की व्याख्या नहीं की है पर उनमें
संशोधन की विधि बतायी हैं। इसके
अतिरिक्त चन्द्र गति में उन्होंने जो संशोधन
किया है वह शुद्धता में आधुनिक गणित के
समकक्ष है।
हिन्दी अनुवाद का उद्देश्य- सिद्धान्त
दर्पण- उड़िया लिपि के संस्कृत श्लोकों में
होने के कारण अभी तक इस ग्रन्थ के बारे में
प्रायः कोई नहीं जानता है। उड़ीसा में भी इसे
समझने वाले कोई नहीं हैं। हिन्दी अनुवाद से
इसका आधा उद्देश्य पूर्ण होगा। मूल ग्रन्थ में
क्या था, इसकी जानकारी होगी तथा पूरे भारत
में इसका प्रचार होगा। इसी के साथ प्रो.
योगेश चन्द्र राय की अंग्रेजी भूमिका भी दी
जा रही है क्योंकि आधुनिक ज्योतिष पर इस
ग्रन्थ में जो तर्क हैं उनकी बातचीत के ही
आधार पर हैं। ग्रन्थ में प्रयुक्त गणितीय शब्दों
के अर्थ अलग दिये हैं।
१. नाम - अरुण कुमार उपाध्याय, पिता
श्री चन्द्रशेखर उपाध्याय तथा माता श्रीमती
जगतारिणी देवी (दोनों का जन्म १९०५ में) की
कनिष्ठ सन्तान।
२. जन्म - ३०/३१-८-१९५२ ईस्वीय
सन् ठीक अर्धरात्रि अर्थात विक्रम सम्वत्
२००९ भाद्रशुक्ल एकादशी, जन्म स्थान -
आरा, जिला भोजपुर (बिहार) अक्षांश २५°३६'
उत्तर, देशान्तर- ८४°४२' पूर्व ।
३. शिक्षा - १९६१ में रेलवे स्कूल
जमालपुर (मुंगेर) बिहार में कक्षा ६ से विद्यालय
शिक्षा आरम्भ।
१९६३ से १९६६ तक उच्च विद्यालय
शिक्षा तेनु अज (विक्रम गंज) रोहतास जिला में।
इस अवधि में स्वाध्यायी छात्र के रूप में
कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय से प्रथमा
और मध्यमा परीक्षा। पिता द्वारा संस्कृत और
ज्योतिष का शिक्षण।
पटना विश्वविद्यालय की जातिवादी
राजनीति के कारण भौतिक विज्ञान अध्ययन में
बाधा, अतः १९७४ में भारतीय वन सेवा, पंजाब
संवर्ग में योगदान, पर अध्ययन का निश्चय और
दृढ़।
१९७६ में भारतीय पुलिस सेवा, उड़ीसा
संवर्ग में प्रवेश। १९८१ में भुवनेश्वर निवास
में चार मास तक गणित का स्वाध्याय एवं उत्कल
विश्वविद्यालय से गणित स्नातकोत्तर परीक्षा
उत्तीर्ण। अभी कटक में पदस्थापित।
४. ग्रन्थ की प्रेरणा तथा समर्पण -
गणित के अध्ययन क्रम में ब्रह्म स्फुट सिद्धान्त
का अध्ययन। १९९१ के बाद अकर्मिक पदों
पर रहते समय सिद्धान्त दर्पण का अनुवाद एवं
वैज्ञानिक व्याख्या। परिवार परम्परा में संस्कृत
एवं संस्कृति की ज्योति प्रज्वलित रखने की
प्रेरणा पिता और गुरु श्री चन्द्रशेखर उपाध्याय
से मिली, जिनकी अपूर्ण इच्छा की पूर्ति के रूप
में यह व्याख्या लिखी गयी। अतः उन्हीं को
समर्पित।