सिद्धसिद्धान्तपद्धति (गुरु गोरखनाथ - पिण्ड-उत्पत्ति, पिण्ड-विचार एवं ब्रह्माण्ड-एकात्म दर्शन)
Siddha Siddhanta Paddhati of Guru Gorakhnath with Commentary
गुरु गोरखनाथ (सम्पादक: गोरक्षनाथ मन्दिर शोध संस्थान, गोरखपुर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंएतच्छास्त्रं महादिव्य रहस्यं पारमेश्वरम् ।
सिद्धान्तं सर्वसारञ्च नानासंकेतनिर्णयम् ॥
सिद्धाना प्रकट सिद्धं सद्यः प्रत्ययकारकम् ।
आत्मानन्दकरं नित्यं सर्वसन्देहनाशनम् ॥
( सिद्धसिद्धान्तपद्धति ६ । ६७-६८ )
यद्यपि सिद्धसिद्धान्तपद्धति में योग के दार्शनिक पक्ष का प्रतिपादन ही विशेष
रूप से परिलक्षित है तथापि साधनासम्वन्धी सूक्ष्मातिसूक्ष्म प्रकियात्मक रहस्यों
के अनुभवपूर्ण विवेचन से भी यह सर्वथा सम्पन्न है । यह हमारे नाथयोग का
अद्भूत वाङमय है । हमारे मन में कई वर्षों पहले यह संकल्प उदित हुआ था कि
इसका शुद्ध संस्कृतपाठसहित हिन्दी में सहज सुबोध भाष्य की प्रस्तुतिपूर्वक प्रकाशन
हो । हमारी इच्छा थी कि हमारे गोरक्षसिद्धयोगपीठ से इस तरह का लोकप्रिय
संस्करण नाथयोग के सत्सिद्धान्तों के प्रचार-प्रसार में सहायक हो । श्रीगोरखनाथ
मन्दिर, गोरखपुर से प्रकाशित होने वाले "योगवाणी" मासिक के सम्पादक
रामलालजी श्रीवास्तव ने हिन्दी में सहज-सुबोध भाष्य प्रस्तुत कर 'सिद्ध-
सिद्धान्तपद्धति' की यौगिक गरिमा ही नहीं बढ़ायी, हमारी इच्छा और पवित्र संकल्प
की पूर्ति में भी अपनी महनीय भूमिका निवाही है । उनके अनुभवपूर्ण मार्मिक
भाष्य से 'सिद्धसिद्धान्तपद्धति' को समझने में योगसाधकों को बड़ी सुगमता होगी ।
हम इस कार्य के लिये उन्हें हृदय से आशीर्वाद प्रदान करते हैं । शिवगोरक्ष
भगवान् गोरखनाथजी ने 'सिद्धसिद्धान्तपद्धति' के रूप में अद्भुत योगशास्त्र प्रदान
किया और इसका सूक्ष्म रहस्य उनके चरणाश्रय से ही समझ में आ सकता है ।
हम उन्हीं के मांगलिक वचन ( सि० सि० प० ६ । ११५ ) के प्रकाशन में बड़े
आत्मविश्वास से यह कहने का साहस करते हैं कि योगसाधकों-भक्तों पर अनुग्रह-
स्वरूप परमानन्ददायक गणपतिनाम का तेज सिद्धसिद्धान्त के प्रकाश से प्राणीमात्र
की चेतना को आलोकित करे ।
विद्वात्वर्थनिचयं भक्तानुग्रहमूर्त्तिमत् ।
स्मरानन्दभरं चेतो गाणपत्यभिधं महः ।
गोरखनाथ-मन्दिर, गोरखपुर महन्त अवेद्यनाथ
विजयादशमी २०३८ वि० (गोरक्षपीठाधीश्वर)
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