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सर्वकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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चिन्ता-सूत्र

  • ( १ ) मनोमोहिनी काम-मदसे मतवाली पुष्टकुचोंवाली
    सुन्दरी ... ... २७
  • ( २ ) पुण्य-कर्म सञ्चय करनेसे पुष्ट कुचोंवाली
    सुन्दरी नारी मिलती है ... ... ६८
  • ( ३ ) स्त्रियों के नितम्ब या पर्वतों के नितम्ब ... ७०
  • ( ४ ) अभिसारिका नायिका जो चन्द्र-किरणों को भी
    सह नहीं सकती ... ... ... ६७
  • ( ५ ) वसन्तमें विरहिणी सुन्दरी मनमलीन किये बेटी है १३८
  • ( ६ ) गरमीके मौसममें छत पर स्त्री-पुरुष ... १४६
  • ( ७ ) वर्षा-काल की अँधेरी रातमें अपने यारके पास
    जानेवाली अभिसारिकानायिका दुःखीऔरसुखी १६०
  • ( ८ ) वर्षा की ऋतुमें शीतके मारे स्त्री-पुरुष परस्पर
    आलिङ्गन किये पड़े हैं। ... ... १६२
  • ( ९ ) शरद की चाँदनी रातमें, रतिश्रमसे थकी
    हुई प्यारोके हाथोंसे लाई हुई भारीका जल १६५
  • ( १० ) जो शूरवीर गजराज और मृगराज को भी मार
    सकता है, वही स्त्रीके सामने हाथ जोड़े खड़ा है १६३