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सर्वकोश
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

DevanagariHindipublished2,621 पृष्ठ

पृष्ठ 42, कुल 2621 में से

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पृष्ठ 42

१९- रावणको देखकर दुःख, भय और चिन्तामें डूबी हुई सीताकी अवस्थाका वर्णन
२०- रावणका सीताजीको प्रलोभन
२१- सीताजीका रावणको समझाना और उसे श्रीरामके सामने नगण्य बताना
२२- रावणका सीताको दो मासकी अवधि देना, सीताका उसे फटकारना, फिर रावणका उन्हें धमकाकर राक्षसियोंके नियन्त्रणमें रखकर स्त्रियोंसहित पुनः महलको लौट जाना
२३- राक्षसियोंका सीताजीको समझाना
२४- सीताजीका राक्षसियोंकी बात माननेसे इनकार कर देना तथा राक्षसियोंका उन्हें मारने-काटनेकी धमकी देना
२५- राक्षसियोंकी बात माननेसे इनकार करके शोक-संतप्त सीताका विलाप करना
२६- सीताका करुण-विलाप तथा अपने प्राणोंको त्याग देनेका निश्चय करना
२७- त्रिजटाका स्वप्न, राक्षसोंके विनाश और श्रीरघुनाथजीकी विजयकी शुभ सूचना.
२८- विलाप करती हुई सीताका प्राण-त्यागके लिये उद्यत होना
२९- सीताजीके शुभ शकुन
३०- सीताजीसे वार्तालाप करनेके विषयमें हनुमान्जीका विचार करना
३१- हनुमान्जीका सीताको सुनानेके लिये श्रीराम-कथाका वर्णन करना
३२- सीताजीका तर्क-वितर्क
३३- सीताजीका हनुमान्जीको अपना परिचय देते हुए अपने वनगमन और अपहरणका वृत्तान्त बताना
३४- सीताजीका हनुमान्जीके प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान्जीके द्वारा श्रीरामचन्द्रजीके गुणोंका गान
३५- सीताजीके पूछनेपर हनुमान्जीका श्रीरामके शारीरिक चिह्नों और गुणोंका वर्णन करना तथा नर-वानरकी मित्रताका प्रसङ्ग सुनाकर सीताजीके मनमें विश्वास उत्पन्न करना
३६- हनुमान्जीका सीताको मुद्रिका देना, सीताका ‘श्रीराम कब मेरा उद्धार करेंगे’ यह उत्सुक होकर पूछना तथा हनुमान्जीका श्रीरामके सीताविषयक प्रेमका वर्णन करके उन्हें सान्त्वना देना
३७- सीताका हनुमान्जीसे श्रीरामको शीघ्र बुलानेका आग्रह, हनुमान्जीका सीतासे अपने साथ चलनेका अनुरोध तथा सीताका अस्वीकार करना