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श्रीमद्भागवत महापुराण

Shrimad Bhagavata Mahapurana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished1,617 पृष्ठ

।। श्रीहरिः ।।

श्रीमद्भागवतकी आरती

आरति अतिपावन पुरानकी ।
धर्म-भक्ति-विज्ञान-खानकी ।।टेक।।
महापुरान भागवत निरमल ।
शुक-मुख-विगलित निगम-कल्प-फल ।
परमानन्द-सुधा-रसमय कल ।
लीला-रति-रस रसनिधानकी ।।आरति०।।
कलि-मल-मथनि त्रिताप-निवारिनि ।
जन्म-मृत्युमय भव-भय-हारिनि ।
सेवत सतत सकल सुख-कारिनि ।
सुमहौषधि हरि-चरित-गानकी ।।आरति०।।
विषय-विलास-विमोह-विनाशिनि ।
विमल विराग विवेक विकाशिनि ।
भगवत्-तत्त्व-रहस्य-प्रकाशिनि ।
परम ज्योति परमात्म-ज्ञानकी ।।आरति०।।
परमहंस-मुनि-मन उल्लासिनि ।
रसिक-हृदय रस-रास विलासिनि ।
भुक्ति मुक्ति रति प्रेम सुदासिनि ।
कथा अकिञ्चनप्रिय सुजानकी ।।आरति०।।

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गीताप्रेस, गोरखपुर

भगवान् व्यासका पुराण-प्रवचन
Vyāsa discourses on Purāṇas

गीताप्रेस, गोरखपुर

महाप्रयाणके समय भीष्मपर भगवान्‌की कृपा
The departing Bhīṣma graced by the Lord

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गीताप्रेस, गोरखपुर

भगवान् नारायणके नाभि-कमलसे लोकपितामह ब्रह्माकी उत्पत्ति
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गीताप्रेस, गोरखपुर

B. K. Mitra

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Vision of Lord Varāha to Gods and Ṛṣis

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गीताप्रेस, गोरखपुर

माता देवहूतिको भगवान् कपिलका तत्त्वोपदेश
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गीताप्रेस, गोरखपुर

बालक ध्रुवपर भगवान्का अनुग्रह
The grace of Lord descends on Dhruva

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नवधा भक्ति

  • श्रवण
  • कीर्तन
  • स्मरण
  • पादसेवन
  • अर्चन
  • वन्दन
  • दास्य
  • सख्य
  • आत्मनिवेदन

भक्तिदेवी


गीताप्रेस, गोरखपुर
B. K. Mitra

भक्तिके नौ प्रकार
Ninefold devotion