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सर्वकोश
श्रीमद्भागवत महापुराण

श्रीमद्भागवत महापुराण

Shrimad Bhagavata Mahapurana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 181

अग्निष्टोमादि यज्ञको चातुर्होत्र कहते हैं।
१.-यहाँ प्राचीन प्रतिमें ‘नारदागमनं’ इतना पाठ अधिक है।