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सर्वकोश
श्रीमद्भागवत महापुराण

श्रीमद्भागवत महापुराण

Shrimad Bhagavata Mahapurana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished1,617 पृष्ठ

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पृष्ठ 13

१-अजामिलोपाख्यानका प्रारम्भ
२-विष्णुदूतोंद्वारा भागवतधर्म-निरूपण और अजामिलका परमधामगमन
३-यम और यमदूतोंका संवाद
४-दक्षके द्वारा भगवान्‌की स्तुति और भगवान्‌का प्रादुर्भाव
५-श्रीनारदजीके उपदेशसे दक्षपुत्रोंकी विरक्ति तथा नारदजीको दक्षका शाप
६-दक्षप्रजापतिकी साठ कन्याओंके वंशका विवरण
७-बृहस्पतिजीके द्वारा देवताओंका त्याग और विश्वरूपका देवगुरुके रूपमें वरण
८-नारायणकवचका उपदेश
९-विश्वरूपका वध, वृत्रासुरद्वारा देवताओंकी हार और भगवान्‌की प्रेरणासे देवताओंका
दधीचि ऋषिके पास जाना
१०-देवताओंद्वारा दधीचि ऋषिकी अस्थियोंसे वज्रनिर्माण और वृत्रासुरकी सेनापर आक्रमण
११-वृत्रासुरकी वीरवाणी और भगवत्प्राप्ति
१२-वृत्रासुरका वध
१३-इन्द्रपर ब्रह्महत्याका आक्रमण
१४-वृत्रासुरका पूर्वचरित्र
१५-चित्रकेतुको अंगिरा और नारदजीका उपदेश
१६-चित्रकेतुका वैराग्य तथा संकर्षणदेवके दर्शन
१७-चित्रकेतुको पार्वतीजीका शाप
१८-अदिति और दितिकी सन्तानोंकी तथा मरुद्गणोंकी उत्पत्तिका वर्णन
१९-पुंसवन-व्रतकी विधि

सप्तम स्कन्ध

१-नारद-युधिष्ठिर-संवाद और जय-विजयकी कथा
२-हिरण्याक्षका वध होनेपर हिरण्यकशिपुका अपनी माता और कुटुम्बियोंको समझाना
३-हिरण्यकशिपुकी तपस्या और वरप्राप्ति
४-हिरण्यकशिपुके अत्याचार और प्रह्लादके गुणोंका वर्णन
५-हिरण्यकशिपुके द्वारा प्रह्लादजीके वधका प्रयत्न
६-प्रह्लादजीका असुर-बालकोंको उपदेश
७-प्रह्लादजीद्वारा माताके गर्भमें प्राप्त हुए नारदजीके उपदेशका वर्णन
८-नृसिंहभगवान्‌का प्रादुर्भाव, हिरण्यकशिपुका वध एवं ब्रह्मादि देवताओंद्वारा भगवान्‌की
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