सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
श्रीमद्भागवत महापुराण

श्रीमद्भागवत महापुराण

Shrimad Bhagavata Mahapurana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished1,617 पृष्ठ

पृष्ठ 1116, कुल 1617 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1116

धर्मं भागवतं शुद्धं त्रैविद्यं च गुणाश्रयम् ॥ २४

भक्तिमान् भगवत्याशु माहात्म्यश्रवणाद्धरेः ।
अनुतापो महानासीत्स्मरतोऽशुभमात्मनः ॥ २५

अहो मे परमं कष्टमभूदविजितात्मनः ।
येन विप्लावितं ब्रह्म वृषल्यां जायताऽऽत्मना ॥ २६

धिङ्मां विगर्हितं सद्भिर्दुष्कृतं कुलकज्जलम् ।
हित्वा बालां सतीं योऽहं सुरापामसतीमगाम् ॥ २७

वृद्धावनाथौ पितरौ नान्यबन्धू तपस्विनौ ।
अहो मयाधुना त्यक्तावकृतज्ञेन नीचवत् ॥ २८

सोऽहं व्यक्तं पतिष्यामि नरके भृशदारुणे ।
धर्मघ्नाः कामिनो यत्र विन्दन्ति यमयातनाः ॥ २९

किमिदं स्वप्न आहोस्वित् साक्षाद् दृष्टमिहाद्भुतम् ।
क्व याता अद्य ते ये मां व्यकर्षन् पाशपाणयः ॥ ३०

अथ ते क्व गताः सिद्धाश्चत्वारश्चारुदर्शनाः ।
व्यमोचयन्नीयमानं बद्ध्वा पाशैर्धो भुवः ॥ ३१

अथापि मे दुर्भगस्य विबुधोत्तमदर्शने ।
भवितव्यं मङ्गलेन येनात्मा मे प्रसीदति ॥ ३२

निष्पाप परीक्षित्! भगवान्‌के पार्षदोंने देखा कि अजामिल कुछ कहना चाहता है, तब वे सहसा उसके सामने ही वहीं अन्तर्धान हो गये ॥ २३॥ इस अवसरपर अजामिलने भगवान्‌के पार्षदोंसे विशुद्ध भागवत-धर्म और यमदूतोंके मुखसे वेदोक्त सगुण (प्रवृत्तिविषयक) धर्मका श्रवण किया था ॥ २४॥ सर्वपापापहारी भगवान्‌की महिमा सुननेसे अजामिलके हृदयमें शीघ्र ही भक्तिका उदय हो गया। अब उसे अपने पापोंको याद करके बड़ा पश्चात्ताप होने लगा ॥ २५॥ (अजामिल मन-ही-मन सोचने लगा—) ‘अरे, मैं कैसा इन्द्रियोंका दास हूँ! मैंने एक दासीके गर्भसे पुत्र उत्पन्न करके अपना ब्राह्मणत्व नष्ट कर दिया। यह बड़े दुःखकी बात है ॥ २६॥ धिक्कार है! मुझे बार-बार धिक्कार है! मैं संतोंके द्वारा निन्दित हूँ, पापात्मा हूँ! मैंने अपने कुलमें कलंकका टीका लगा दिया! हाय-हाय, मैंने अपनी सती एवं अबोध पत्नीका

ebook converter DEMO Watermarks*