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श्रीरामचरितमानस

Shri Ramcharitmanas

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

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DevanagariHindipublished1,058 पृष्ठ

इस ग्रन्थ के बारे में

'श्रीरामचरितमानस' गोस्वामी तुलसीदास (सोलहवीं-सत्रहवीं शताब्दी) का अवधी महाकाव्य है, जिसे उत्तर भारत में घर-घर में पढ़ा और गाया जाता है। दोहा-चौपाई छन्दों में रचा यह ग्रन्थ रामकथा को भक्ति की दृष्टि से कहता है, और इसकी कथा शिव-पार्वती, याज्ञवल्क्य-भरद्वाज और काकभुशुण्डि-गरुड़ के संवादों के ढाँचे में चलती है। ग्रन्थ सात काण्डों में है: बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड और उत्तरकाण्ड।

यह गीताप्रेस, गोरखपुर का सचित्र, सटीक और मोटे टाइप वाला संस्करण (पुस्तक-संख्या ८१) है, जिसके टीकाकार हनुमानप्रसाद पोद्दार हैं। इसमें मूल दोहे-चौपाइयों के साथ हर पद का सरल हिन्दी अर्थ दिया गया है। आरम्भ के 'निवेदन' में मानस को हिन्दी ही नहीं, विश्व-साहित्य में अनुपम बताया गया है, क्योंकि यह काव्य-कला के साथ आदर्श गृहस्थ-जीवन, राजधर्म, भ्रातृ-प्रेम, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की शिक्षा देता है।

बड़े अक्षरों के कारण यह संस्करण बुज़ुर्ग पाठकों और सामूहिक पाठ के लिए विशेष रूप से सुविधाजनक है। चित्रों सहित इसके १०५८ पृष्ठ यहाँ पढ़े जा सकते हैं।

पृष्ठ 1058–1058, कुल 1058 में से

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