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सर्वकोश
श्री गुरु गीता (स्कन्द पुराण - उमा-महेश्वर संवाद सान्वय सटीक)

श्री गुरु गीता (स्कन्द पुराण - उमा-महेश्वर संवाद सान्वय सटीक)

Shri Guru Gita from Skanda Purana with Hindi Commentary

भगवान् शिव / महर्षि वेदव्यास / डॉ. मोतीलाल खद्दर शास्त्री द्वारा

DevanagariSanskritpublished82 पृष्ठ

पृष्ठ 73, कुल 82 में से

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पृष्ठ 73

पुष्पाञ्जलि एवं प्रदक्षिणादि
हाथ में पुष्प लेकर निम्न मन्त्रों को पढ़ें-
ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्म्माणिप्प्रथमान्यासन्।
ते हनाकम्महिमानः सचन्त यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः।
ॐ राजाधिराजाय प्रसह्य साहिने। नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे।
स मे कामान् कामकामाय मह्यं। कामेश्वरी वैश्रवणो ददातु।
कुबेराय वैश्रवणाय महाराजाय नमः। ॐ स्वस्ति साम्राज्यं भौज्यं
स्वाराज्यं वैराज्यं पारमेष्ठयं राज्यं महाराज्यमाधिपत्यमयं समन्त-
पर्यायी स्यात्सार्वभौमः सार्वायुष आन्तादापरार्धात्। पृथिव्यै समुद्र-
पर्यन्ताया एकराडिति तदप्येष श्लोकोऽभिगीतो मरुतःपरिवेष्टातारो
मरुत्तभ्यावसन्गृहे, आविक्षितस्य कामप्रे विश्वेदेवाः सभासद इति।
ॐ विश्वतश्चक्षुरुत विश्वतोमुखो विश्वतो वाहुरुतविश्वतस्प्पात्।
सम्बाहुभ्यांधमति सम्पतत्रैर्द्यावाभूमी जनयन्देवएकः। ॐकुलकुमार्यै
विद्महे पीताम्बरायै धीमहि तन्नो बगला प्रचोदयात्। नानाविधानि
पुष्पाणि यथाकालोद्भव्वानि च। पुष्पांजलिं मया दत्तं गृहाण बगलामुखि।
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