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शिवताण्डव स्तोत्रम् (लङ्काधिपति रावण प्रणीत - सान्वय संस्कृत मूल एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Shiva Tandava Stotram of Ravana

दशानन रावण (व्याख्याकार: पं. ज्वाला प्रसाद चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

भगवान के पांच विचित्र अवतारों की कथा
लेखक — स्वामी श्री अखण्डानंद जी महाराज
पुस्तक रूप में प्रस्तुत श्री मत्स्यावतार कथा, कच्छपावतार कथा, वराहावतार कथा,
वामनावतार कथा तथा नृसिंहावतार कथा में लेखक ने जन साधारण को यह रोचक
कथाऐं तो उपलब्ध कराई ही हैं तथा ये भी बताया है कि भगवान की महिमा अनंत
है। निर्गुण-निराकार, सगुण-साकार सब उन्हीं का स्वरूप है। बुद्धि जितना सोच सकती
है, जितना आकलन कर सकती है और जितना बड़ा काल्पनिक मानचित्र बना सकती
है उसके भी परे, बहुत परे भगवान विराजमान हैं। मन वहां नहीं पहुँच सकता, वाणी
उनका वर्णन नहीं कर सकती। हमारे पास देखने और जानने के जितने साधन हैं उनके
बल पर हम भगवान को नहीं पा सकते। वे स्वयं ही कृपा करके जिस पर अपनी
महिमा प्रकट कर दें और अपने दर्शन तथा अनुभव का अधिकारी चुन लें, वही उन
तक पहुँच सकता है।
नीति ग्रन्थों के अमृत कण
संग्रहकर्ता — बाल कृष्ण मुज़तर
हिन्दू शास्त्रों और विभिन्न नीति ग्रन्थों में वर्णित सामान्य जीवन और व्यवहार के लिये
उपयोगी महापुरुषों का विवेक विचार। प्रत्येक आयु के पाठक के लिये एक उपयोगी
पुस्तक।
ज्ञान की राह दिखाने वाले
महापुरुषों के अनमोल वचन
संग्रह और सम्पादन — नंदलाल दशोरा
जितना ही हम अध्ययन करते हैं उतना ही हमें अज्ञान का आभास होता जाता है।
पढ़ना तो सभी जानते हैं लेकिन क्या पढ़ना चाहिये ये पुस्तक आपको यह सोचने पर
मजबूर करेगी कि आपको क्या पढ़ना चाहिए।
रणधीर बुक सेल्स (प्रकाशन) हरिद्वार