शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ७४ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता ।
योगकी घटना होगी तब यह संसारचक्र योगीको कुछ
असाध्य न रहेगा ॥ ६५ ॥
मूलम्-प्राणापाननादबिंदुजीवात्मपरमात्म
नः ॥ मिलित्वा घटते यस्मात्तस्माद्वै घट
उच्यते ॥ ६६ ॥
टीका-प्राण अपान नाद विन्दु जीव आत्मा और
परमात्मा इनको एकत्र घटना होनेसे इसको घटावस्था
कहते हैं ॥ ६६ ॥
मूलम्-याममात्रं यदा धर्त्तुं समर्थः स्यात्त-
दाद्भुतः ॥ प्रत्याहारस्तदैव स्यान्नांतरा
भवति ध्रुवम् ॥ ६७ ॥
टीका-एक प्रहर मात्र जब वायु धारण करनेकी
सामर्थ्य होगी तब अद्भुत प्रत्याहारकी शक्ति होगी और
साधनसे न होगी निश्चय है ॥ ६७ ॥
मूलम्-यं यं जानाति योगीन्द्रस्तं तमात्मे-
ति भावयेत् ॥ यैरिन्द्रियैर्यद्विधानस्तदि-
न्द्रयजयो भवेत् ॥ ६८ ॥
टीका-योगी जो जो पदार्थ जाने सो सो पदार्थमें
आत्माकाही भावना करे जो इंद्रियसे जिस पदार्थका
बोध होगा उस पदार्थमें वही आत्मभावनासे वह इंद्रिय