सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 6, कुल 216 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 6

शिवसंहिता
भाषाटीका ।
प्रथमपटलः
मूलम्-एकंज्ञानं नित्यमाद्यन्तशून्यं ना-
न्यत् किञ्चिद्वर्त्तते वस्तु सत्यम् ॥ यद्भे-
दोस्मि न्निन्द्रियोपाधिना वै ज्ञानस्यायं
भासते नान्यथैव ॥ १ ॥
टीका-केवल एक ज्ञान नित्य आदि अन्तरहित है
ज्ञानसे अलग अन्य कोई वस्तु सत्य संसारमें वर्त्तमान
नहीं है केवल इन्द्रियोपाधिद्वारा संसार जो भिन्न भिन्न
बोध होताहै सो यह ज्ञानमात्रही प्रकाश होता है और
कुछ नहीं है अर्थात् ज्ञानसे भिन्न कुछ नहीं है ॥ १ ॥
मूलम्-अथ भक्तानुरक्तोऽहं वक्ष्ये योगानु-
शासनम् ॥ ईश्वरः सर्वभूतानामात्ममुक्ति-
प्रदायकः ॥ २ ॥ त्यक्त्वा विवादशीलानां
मतं दुर्ज्ञानहेतुकम् ॥ आत्मज्ञानाय भूता-
नामनन्यगतिचेतसाम् ॥ ३ ॥
टीका-सर्व प्राणिमात्रके ईश्वर आत्ममुक्तिप्रदायक
भक्तवत्सल जिन मनुष्योंको सिवाय आत्मज्ञानके
अन्य गति नहीं है उनके हेतु कृपापूर्वक योगोप-