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सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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पृष्ठ 29

प्रथमपटलः । (२५)
टीका-यह झूठा मायाका प्रपंच विषयसुख धन
शरीर है इनमें प्रीति करना उचित नहीं है यह सब
त्यागनेके योग्य है ॥ ६९ ॥
मूलम्-अरिर्मित्रमुदासीनस्त्रिविधं स्यादिदं
जगत् ॥ व्यवहारेषु नियतं दृश्यते
नान्यथा पुनः ॥ ७० ॥
टीका-शत्रु मित्र उदासीनता यही तीन प्रकारके
व्यवहारका प्रवाह इस संसारमें निश्चय देखपड़ता है॥७०॥
मूलम्-प्रियाप्रियादिभेदस्तु वस्तुषु नियतः
स्फुटम् ॥ आत्मोपाधिवशादेवं भवेत्पुत्रा-
दि नान्यथा ॥७१॥ मायाविलसितं विश्वं
ज्ञात्वैवं श्रुतियुक्तितः ॥ अध्यारोपापवा-
दाभ्यां लयं कुर्वन्ति योगिनः ॥ ७२ ॥
टीका-और प्रिय अप्रिय यही दो भेदसे जगत् बँधा
है ॥ आत्माके उपाधिसे पिता पुत्रादि होतेहैं यह जगत्
मायासे विलसितहै यह श्रुति प्रमाणसे जानके योगी
लोग अध्यारोप अपवादसे आत्मामें लय करतेहैं अ-
र्थात् शुद्धचैतन्यका मनन करते हैं ॥ ७१ ॥ ७२ ॥
मूलम्-कर्मजन्यं विश्वमिदं नत्वकर्मणि
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