सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 208, कुल 216 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 208

( २०४ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता ।
जो गृहस्थ होगा और इन्द्रियोंमें आसक्त न होगा सो मनु-
ष्य योगसाधनसे मुक्तहोगा ॥ २६४॥ २६५ ॥ २६६ ॥
मूलम्-गृहस्थानां भवेत्सिद्धिरीश्वराणां
जपेन वै ॥ योगक्रियाभियुक्तानां तस्मा-
त्संयतते गृही ॥ २६७ ॥
टीका-योगक्रियावान् गृहस्थ लोगोंको जप करनेसे
सिद्धि प्राप्तहोगी इस हेतुसे योगसाधनमें गृहस्थ मनु-
ष्यको यत्न करना उचित है ॥ २६७ ॥
मूलम्-गेहे स्थित्वा पुत्रदारादिपूर्णः सङ्गं
त्यक्त्वा चान्तरे योगमार्गे॥ सिद्धेश्चिह्नं वी-
क्ष्य पश्चाद् गृहस्थः क्रीडेत्सो वै संमतं
साधयित्वा ॥ २६८ ॥
टीका-जो गृहस्थ गृहमें रहके स्त्रीपुत्रादिसे पूर्ण
होके अंतरीय सबसे त्यागपूर्वक योगसाधनसे प्रवृत्त
होय सो सिद्धिचिह्न अवलोकनपूर्वक साधना करके
सर्वदा आनन्दमें क्रीडा करेगा ॥ २६८ ॥
इति श्रीशिवसंहितायां हरगौरीसंवादे योगशास्त्रे
पंचमः पटलः समाप्तः ॥ ५ ॥ शुभम् ॥
समाप्तोऽयं ग्रन्थः ।
पुस्तक मिलनेका ठिकाना-
खेमराज, श्रीकृष्णदास,
"श्रीवेङ्कटेश्वर" छापाखाना, खेतवाड़ी-बंबई.