सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 187, कुल 216 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 187

पंचमपटलः । ( १८३ )
टीका-तालुके ऊपरभागमें दिव्य सहस्रदल कमल
है यह कमल मुक्तिदाता ब्रह्माण्डरूपी शरीरके बाहर
स्थित है अर्थात् शरीरके ऊपर अंतमें है इसी कमल-
को कैलास कहते हैं इसी स्थानमें महेश्वरकी स्थिति है
यह ईश्वर निराकुल अविनाशी और क्षयवृद्धिरहित
है ॥ १९५ ॥ १९६ ॥
मूलम्-स्थानस्यास्य ज्ञानमात्रेण नृणां सं-
सारेऽस्मिन्सम्भवो नैव भूयः ॥ भूतग्रा-
मं सन्तताभ्यासयोगात्कर्तुं हर्तुं स्याच्च
शक्तिः समग्रा ॥ १९७ ॥
टीका-इस स्थानके ज्ञानमात्रसे जीवका यह सं-
सारमें फिर जन्म नहीं होता और सर्वदा यह ज्ञानयोग
अभ्यास करनेसे जीवमात्रके स्थिति संहार करनेकी
शक्ति उत्पन्न होती है ॥ १९७ ॥
मूलम्-स्थाने परे हंसनिवासभूते कैलासना-
म्नीह निविष्टचेताः॥ योगी हतव्याधिरधः
कृताधिर्वायुश्चिरं जीवति मृत्युमुक्तः१९८॥
टीका-यह कैलासनामक स्थानमें परमहंसका
निवास है सो सहस्रदलकमलमें जो साधक मनको
स्थिर करता है उसकी सकल व्याधि नाश होजाती है
और मृत्युसे छूटके अमर होजाताहै ॥ १९८ ॥