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सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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पृष्ठ 185

पंचमपटलः ( १८१ )
जनम् ॥ १८९ ॥ निरन्तरकृताभ्यासात्त्रि-
दिने पश्यति ध्रुवम्॥ दृष्टिमात्रेण पापौघं
दहत्येव स साधकः ॥ १९० ॥
टीका—वह शिरःस्थित कपालविवरमें सोलह कलासं-
युक्त अमृतकिरणसे युक्त हंससंज्ञक निरंजनका चिन्तन
करे निरन्तर तीन दिन यह अभ्यास करनेसे निरञ्जनका
साक्षात् साधकको अवश्य प्रकाश होगा सो साधकदृष्टिमा-
त्रेसे सर्व पातकोंको दहन करडालेगा ॥ १८९ ॥१९०॥
मूलम्--अनागतञ्च स्फुरति चित्तशुद्धिर्भवे-
त्खलु ॥ सद्यः कृत्वापि दहति महापात-
कपञ्चकम् ॥ १९१ ॥
टीका—यह ध्यान करनेसे अनागतविषयकी स्फू-
र्ति होगी अर्थात् जो विषय कभी उत्पन्न नहीं भया है
उसकी स्फूर्ति होगी और चित्तकी शुद्धि होगी और सा-
धक ध्यानमात्रसे उसी क्षण पञ्चमहापातक दहन कर-
डालेगा ॥ १९१ ॥
मूलम्--आनुकूल्यं ग्रहा यान्ति सर्वे नश्य-
न्त्युपद्रवाः ॥ उपसर्गाः शमं यान्ति युद्धे
जयमवाप्नुयात् ॥ १९२ ॥ खेचरीभूचरी-
सिद्धिर्भवेत्क्षीरेन्दुदर्शनात् ॥ ध्यानादेव