शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १७६ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता ।
टीका- गंगा यमुनाके मध्यमें सरस्वतीका प्रवाह है
यह त्रिवेणीसंगममें स्नान करनेसे मनुष्य परमगतिको
प्राप्त होता है ॥ १७३ ॥
मूलम्-इडा गंगा पुरा प्रोक्ता पिंगला चार्कपु-
त्रिका ॥ मध्या सरस्वती प्रोक्ता तासां
संगोऽतिदुर्लभः ॥ १७४ ॥
टीका-इडा गंगा है और पिंगला यमुना है और
मध्यमें सुषुम्णा सरस्वती है यह त्रिवेणी संगम कहा
गया है इसका स्नान अतिदुर्लभ है ॥ १७४ ॥
मूलम्-सितासिते संगमे यो मनसा स्ना-
नमाचरेत् ॥ सर्वपापविनिर्मुक्तो याति
ब्रह्मसनातनम् ॥ १७५ ॥
टीका-यह इडा और पिंगलाके संगममें मानसिक
स्नान करनेसे साधक सर्व पापसे मुक्त होके सनातन
ब्रह्ममें लय होजाताहै ॥ १७५ ॥
मूलम्-त्रिवेण्यां संगमे यो वै पितृकर्म स-
माचरेत् ॥ तारयित्वा पितृन्सर्वान्स याति
परमां गतिम् ॥ १७६ ॥
टीका-जो पुरुष इस त्रिवेणीसंगममें पितृकर्मका