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सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 148, कुल 216 में से

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पृष्ठ 148

( १४४ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता ।
मूलम्--अहर्निशं यदा चिन्तां तत्करोति वि-
चक्षणः ॥ सिद्धानां दर्शनं तस्य भाषणञ्च
भवेद्ध्रुवम् ॥ ६५ ॥
टीका--जो बुद्धिमान् साधक रात्रि दिवस यह चि-
न्तवन करते हैं उनको सिद्धलोगोंका अवश्य दर्शन
और उनसे भाषण होताहै ॥ ६५ ॥
मूलम्--तिष्ठन् गच्छन् स्वपन् भुञ्जन् ध्या-
येच्छून्यमहर्निशम् ॥ तदाकाशमयो यो-
गी चिदाकाशे विलीयते ॥ ६६ ॥
टीका--जो पुरुष चलते बैठते सोते भोजन करते रा-
त्रिदिवस यह ध्यान करते हैं सो आकाशस्वरूप योगी
चिदाकाश अर्थात् परमात्मामें लय होजाते हैं ॥ ६६ ॥
मूलम्--एतज्ज्ञानं सदा कार्यं योगिना सि-
द्धिमिच्छता ॥ निरन्तरकृताभ्यासान्मम
तुल्यो भवेद्ध्रुवम् ॥ एतज्ज्ञानबलाद्योगी
सर्वेषां वल्लभो भवेत् ॥ ६७ ॥
टीका--सिद्धिकांक्षी योगीको इस ध्यानका सर्वदा
अभ्यास करना उचित है सर्वदा अभ्यास करनेसे हेपा-
र्वती ! हमारे तुल्य होजायगा निश्चय, इस ज्ञानबलसे योगी
सबको अर्थात् त्रैलोक्यको प्रिय होजाताहै ॥ ६७ ॥