शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)
Shiva Samhita with Hindi Commentary
भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपंचमपटलः। ( १०३ )
टीका-अब प्रतीकउपासना कहतेहैं प्रतीकउपास-
नासे दृष्टादृष्टफल लाभ होताहै और उसके दर्शनसे
मनुष्य पवित्र होताहै इसमें संशय नहीं है ॥ ३० ॥
मूलम्-गाढातपे स्वप्रतिबिम्बितेश्वरं निरी-
क्ष्य विस्फारितलोचनद्वयम् ॥ यदा नभः
पश्यति स्वप्रतीकं नभोऽङ्गणे तत्क्षणमेव
पश्यति ॥ ३१ ॥
टीका-गाढआतपमें अर्थात् गहरेधूपमें स्वईश्वरका
प्रतिबिम्ब नेत्रास्थिरकरके देखे जब अपने छायाका
प्रतिबिम्ब शून्यमें देखपडे तब ऊपर आकाशमें अपना
प्रतिबिम्ब अवश्य देखेगा ॥ ३१ ॥
मूलम्-प्रत्यहं पश्यते यो वै स्वप्रतीकं नभो-
ऽङ्गणे॥ आयुर्वृद्धिर्भवेत्तस्य न मृत्युः स्या-
त्कदाचन ॥ ३२ ॥
टीका-जो नित्य आकाशमें स्वप्रतीक अर्थात्
अपना प्रतिबिम्ब देखेगा उसके आयुकी वृद्धि होगी और
उसकी मृत्यु कभी न होगी अर्थात् चिरंजीवी हो
जायगा ॥ ३२ ॥
मूलम्-यदापश्यतिसम्पूर्णंस्वप्रतीकंनभो-