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शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 128, कुल 216 में से

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पृष्ठ 128

( १२४ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता ।
टीका-हे पार्वती! यह दशमुद्रा जो हमने कहा है इसके
समान न कुछ भया है न होगा इसके एक एकके अ-
भ्यास सिद्ध होनेसे साधक सिद्ध होजायगा ॥ ११२ ॥
इति श्रीशिवसंहितायां हरगौरीसंवादे मुद्राकथनं
नाम चतुर्थपटलः समाप्तः ॥ ४ ॥
अथ पञ्चमः पटलः ।
मूलम्-श्रीदेव्युवाच ॥ ब्रूहि मे वाक्यमी-
शान परमार्थधियं प्रति॥ ये विघ्नाः सन्ति
लोकानां वद मे प्रिय शङ्कर ॥ १ ॥
टीका-श्रीपार्वतीजी कहती है कि, हेईश्वर ! हे प्रिय
शङ्कर ! योगाभ्यासी लोगोंके प्रति जो विघ्न संसारमें हैं
सो भक्तोंपर कृपा करके हमको कहो ॥ १ ॥
मूलम्-ईश्वर उवाच ॥ शृणु देवि प्रवक्ष्या-
मि यथा विघ्नाः स्थिताः सदा ॥ मुक्तिं प्र-
ति नराणाञ्च भोगः परमबन्धनः ॥ २ ॥
टीका-श्रीईश्वर कहते हैं कि, हे देवी ! योगसाधनमें
जो विघ्न हैं सो हम कहते हैं सुनो मनुष्योंके मुक्तिके
प्रति भोग परमबन्धन है ॥ २ ॥
अथ भोगरूपयोगविघ्नविद्याकथनम् ॥
मूलम्-नारी शय्याऽसनं वस्त्रं धनमस्य विड-