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शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

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पृष्ठ 118

( ११४ ) शिवसंहिता भाषाटीकासमेता।
मूलम्-स्वेच्छया वर्तमानोपि योगोक्तनिय-
मैर्विना॥ मुक्तो भवति गार्हस्थ्यो वज्रोल्य-
भ्यासयोगतः ॥ ७९ ॥
टीका-गृहस्थ अपनी इच्छापूर्वक गृहमें भोग करे-
गा और योगमें जो नियम कहा है उसके विना इस व-
ज्रोलीमुद्राके योग अभ्याससे मुक्त होजायगा ॥ ७९ ॥
मूलम्-वज्रोल्यभ्यासयोगोऽयं भोगयुक्ते-
ऽपि मुक्तिदः ॥ तस्मादतिप्रयत्नेन कर्त-
व्यो योगिभिः सदा ॥ ८० ॥
टीका-यह वज्रोलीका योगअभ्यास भोगयुक्त म-
नुष्योंके प्रति मुक्तिका दाता है इसकारणसे अतियत्न
करके सर्वदा योगीको अभ्यास करना उचित है ॥ ८० ॥
मूलम्-आदौ रजः स्त्रियो योन्या यत्नेन वि-
धिवत्सुधीः ॥ आकुंच्य लिंगनालेन स्व-
शरीरे प्रवेशयेत् ॥ ८१ ॥ स्वकं बिंदुञ्च सं-
र्बन्ध्य लिंगचालनमाचरेत् ॥ दैवाच्चल-
ति चेदूर्ध्वं निबद्धो योनिमुद्रया ॥ ८२ ॥
वाममार्गेऽपि तद्विन्दुं नीत्वा लिङ्गं निवार-
येत् ॥ क्षणमात्रं योनितो यः पुमांश्चालन-