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सर्वकोश
शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)

शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)

Shiva Mahimna Stotram with Hindi Commentary

गन्धर्वराज पुष्पदन्त / आचार्य राजेश दीक्षित द्वारा

DevanagariSanskritpublished35 पृष्ठ

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२४ शिवताण्डवस्तोत्रम्
किशोरीके स्तनों पर पत्रभंग-रचना करने के एकमात्र कारीगर उन
भगवान् त्रिलोचन में मेरी धारणा लगी रहे ॥ ७ ॥
नवीनमेघमण्डली निरुद्धदुर्धरस्फुर-
त्कुहूनिशीथिनीतमःप्रबन्धबद्धकन्धरः ।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिन्धुरः
कलानिधानबन्धुरः श्रियं जगद्धुरन्धरः ।८।
जिनके कण्ठमें नवीन मेघमालासे घिरीहुई अमावस्याकी आधी
रातके समय फैलते हुए दुरूह अन्धकारके समान श्यामता अंकित है;
जो गजचर्म लपेटे हुए हैं, वे संसारभार को धारण करने वाले चन्द्रमा
(केसम्पर्क) से मनोहर कान्तिवाले भगवान् गंगाधर मेरी सम्पत्ति का
विस्तार करें ॥ ८ ॥
प्रफुल्लनीलपंकजप्रपंचकालिमप्रभा-
वलम्बिकण्ठकन्दलीरुचिप्रबद्धकन्धरम् ।
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदान्धकच्छिदं तमन्तकच्छिदं भजे ।६।
जिनका कण्ठदेश खिले हुए नीलकमल समूह की श्यामप्रभा
का अनुकरण करने वाली हरिणीकी-सी छवि वाले चिन्ह से सुशोभित
है तथा जो कामदेव, त्रिपुर, भव (संसार), दक्ष-यज्ञ, हाथी, अन्धका-
सुर और यमराजका भी उच्छेदन करनेवाले हैं उन्हें मैं भजता हूँ॥६॥
अखर्वसर्वमंगलाकलाकदम्बमंजरी-