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सर्वकोश
शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)

शिवमहिम्नः स्तोत्रम् (गन्धर्वराज पुष्पदन्त - सानुवाद सटीक)

Shiva Mahimna Stotram with Hindi Commentary

गन्धर्वराज पुष्पदन्त / आचार्य राजेश दीक्षित द्वारा

DevanagariSanskritpublished35 पृष्ठ

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पृष्ठ 19

भाषा-टीका-सहितम् १७
असुरसुरमुनीन्द्रै र्चितस्येन्दुमौले-
र्ग्रथितगुणमहिम्नो निर्गु णस्येश्वरस्य ।
सकलगुणवरिष्ठः पुष्पदन्ताभिधानो
रुचिरमलघुवृत्तैः स्तोत्रमेतच्चकार ॥३३॥
असुर, सुर और मुनियों से पूजित तथा विख्यात महिमा वाले
ऐसे ईश्वर चन्द्रमौलि के इस स्तोत्र को अलघुवृत्त अर्थात् बड़े [शिख-
रिणी] वृत्त में सकल गुण श्रेष्ठ पुष्पदंत नामक गन्धर्व ने बनाया
॥ ३३ ॥
अहरहरनवद्यं धूर्जटेः स्तोत्रमेतत्-
पठति परमभक्त्या शुद्धचित्तः पुमान्यः ।
स भवति शिवलोके रुद्रतुल्यस्तथाऽत्र
प्रचुरतरधनायुः पुत्रवान्कीर्तिमांश्च ॥३४
शुद्धचित्त होकर अनवद्य महादेवजी के इस स्तोत्र को जो पुरुष
प्रतिदिन परम भक्ति से पढ़ता है, वह इस लोक में धन-धान्य, आयु
से युक्त, पुत्रवान् और कीर्तिमान होता है और अन्त में शिव-लोक में
जाकर शिवस्वरूप हो जाता है ॥ ३४ ॥
महेशान्नापरो देवो महिम्नो नापरा स्तुतिः ।
अघोरान्नापरो मन्त्रो नास्ति तत्त्वं गुरोः परम् । ३५।