शिल्परत्नम् (श्रीकुमार - प्राचीन भारतीय चित्रकला, धातुकर्म, यन्त्र एवं स्थापत्य सटीक)

शिल्परत्नम् (श्रीकुमार - प्राचीन भारतीय चित्रकला, धातुकर्म, यन्त्र एवं स्थापत्य सटीक)
Shilparatnam of Shrikumara with Commentary
श्रीकुमार (सम्पादक: टी. गणपति शास्त्री) द्वारा
DevanagariSanskritpublished280 पृष्ठ
पृष्ठ 255, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 255
भिर्गुम्फितो घनम् ।
Wait, in : तनुभिर्गुम्फितो - look at तनुभिर्:
त नु भि र्गु म्फि तो घ न म् ।
Yes, तनुभिर्गुम्फितो घनम् ।
आयामतिर्यक्कर्णाभिर्यथादृष्टिमनोहरम् ॥ ८५ ॥
Wait, आयाम-तिर्यक्-कर्णाभिर्:
आयाम तिर्यक् कर्णा भिर् यथा दृष्टि मनोहरम् ॥ ८५ ॥
Yes!
स्पर्शो मन्दरवाद्यश्च वेत्रमञ्चः प्रकीर्तितः ।
Wait, look at स्पर्शो मन्दरवाद्यश्च:
स्प र्शे or स्पर्शो?
There is an 'o' matra on श: स्पर्शो.
Then मन्दरवाद्यश्च: म न्द र वा द्य श्च.
Wait, or मन्दरावाद्यश्च? No, मन्दरवाद्यश्च.
कार्पासगुणक्लृप्ताभिः सुपट्टाभिः सुगुम्फितः ॥ ८६ ॥
दीर्घाभ